नई दिल्ली । अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने जबसे ‘इंडो-पैसिफिक’ रणनीति से इंडो शब्द को हटा दिया है, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों ने आपसी कूटनीति को एक नई दिशा देना शुरू कर दिया है। इस कूटनीति को और धार देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रशांत महासागर क्षेत्र से जुड़े तीन देशों – इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड – की यात्रा पर हैं। उनकी इस यात्रा को विशेष रूप से चीन के बढ़ते प्रभुत्व के खिलाफ एक निवारक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल डील पर सहमति बनी है, जिससे चीन बौखला गया है। चीनी मीडिया इसे एक रणनीतिक बदलाव के तौर पर देख रही है। अब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ पृथ्वी खनिज) को लेकर एक महत्वपूर्ण करार होने की संभावना है, इसके अलावा यूरेनियम आपूर्ति को लेकर भी एक डील हो सकती है। वर्तमान में रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन का एकाधिकार है, और हाल के महीनों में चीन ने इसके निर्यात पर नकेल कसी है, जिससे भारत भी प्रभावित हुआ है। ऐसे में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स की संभावित डील चीन की मनमानी पर रोक लगाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार, 9 जुलाई, 2026 को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा साझेदारी और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों नेताओं के बीच यूरेनियम निर्यात से जुड़े समझौते को आगे बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान केंद्रित रहने की संभावना है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच निवेश, सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, भारत को यूरेनियम निर्यात से संबंधित समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। हालांकि, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 2014 में असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अब तक यूरेनियम निर्यात सीमित रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह सुनिश्चित करना रही है कि परमाणु ईंधन का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों, विशेष रूप से ऊर्जा उत्पादन के लिए ही किया जाए। संभावित समझौते को लेकर पूछे जाने पर प्रधानमंत्री अल्बनीज ने कहा कि इस विषय पर वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ संयुक्त रूप से जानकारी साझा करेंगे और दोनों देश कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करने वाले हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। भारत ऑस्ट्रेलिया का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में लगभग दस लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदार के रूप में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऑस्ट्रेलिया पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर थे, जहां दोनों देशों के बीच कृषि, रक्षा और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल प्रणाली सहित कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। ऑस्ट्रेलिया यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को न्यूजीलैंड रवाना होंगे और वहां से भारत लौटेंगे। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले संभावित रेयर अर्थ मिनरल्स डील पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, खासकर चीन की इस पर विशेष नजर है। बीजिंग का रेयर अर्थ मिनरल्स पर फिलहाल एकाधिकार है, और ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), स्मार्टफोन और रक्षा क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण होते हैं। इनके बिना इन उत्पादों का उत्पादन संभव नहीं है। इसके अलावा, सेमी-कंडक्टर उद्योग में भी रेयर अर्थ मिनरल्स की भूमिका काफी अहम होती है। ऐसे में भारत का रेयर अर्थ मिनरल्स के सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने और दूसरे विकल्पों पर विचार करना जरूरी हो गया है। यदि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस पर डील पक्की होती है, तो यह चीन के मुंह पर एक करारा तमाचा होगा, जो उसके एकाधिकार को चुनौती देगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाएगा।


