नई दिल्ली । सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस मामले पर चल रही सुनवाई में 9 जजों की संवैधानिक पीठ की अगुवाई कर रहे मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि कोर्ट धार्मिक मामलों में न्यायिक समीक्षा की सीमाओं को समझता है और इस शक्ति पर बार-बार सवाल उठाने की जरूरत नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि न्यायिक समीक्षा की शक्ति पर सीमाओं के बावजूद, वह इस बात की पड़ताल कर सकता है कि क्या सरकार सामाजिक कल्याण या सुधार के नाम पर किसी धार्मिक परंपरा या रीति-रिवाज पर प्रतिबंध लगा सकती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में अदालतों को हस्तक्षेप करने से रोकने के लिए दी गई दलीलों पर सीजेआई ने कहा कि ऐसे मामलों में न्यायिक समीक्षा की सुप्रीम कोर्ट की शक्ति पर कुछ सीमाएं हैं, लेकिन यह कहना कि इस संबंध में कोई अधिकार नहीं है, इसे स्वीकार करना मुश्किल होगा। बता दें सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ में जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। पीठ ने ये टिप्पणियां वरिष्ठ अधिवक्ता जे साई दीपक की दलीलों पर कीं, जो पंडालम शाही परिवार और ऐतिहासिक श्रीउर मठ की ओर से पेश हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी गई कि अगर कोई धार्मिक परंपरा अपने पवित्र स्वरूप के कारण स्वाभाविक रूप से कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, तो सरकार द्वारा किसी कानून के जरिए उस परंपरा को मान्यता देने मात्र से न्यायपालिका को उसकी समीक्षा करने की शक्ति अचानक प्राप्त नहीं हो जाती। इस पर जवाब देते हुए सीजेआई ने कहा कि अगर सरकार सामाजिक कल्याण के नाम पर किसी धार्मिक परंपरा पर प्रतिबंध लगाती है, तो इसकी पड़ताल कौन करेगा? हमारा मानना है कि कुछ सीमाएं हैं, लेकिन यह कहना कि न्यायिक समीक्षा की शक्ति नहीं है, यह बात स्वीकार करना बहुत कठिन हो सकता है। न्यायिक समीक्षा की शक्ति पर इतना हमला करने की कोई जरुरत नहीं।
बता दें 9 जजों की संवैधानिक पीठ केरल के सबरीमाला मंदिर समेत धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न आस्थाओं को मानने वाले लोगों द्वारा पालन की जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और सीमा से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। मंगलवार को सुनवाई का छठा दिन था। बुधवार को भी सुनवाई जारी रही।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


