नई दिल्ली । उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में एक महिला वकील पर हमले के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि इस मामले की जांच एसीपी या डीसीपी रैंक की महिला पुलिस अधिकारी से कराई जाए।
कोर्ट ने जांच अधिकारी को उन तीन अस्पतालों की भी जांच करने को कहा, जिन्होंने पीड़ित महिला वकील को इलाज के लिए भर्ती करने से इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है और पीड़ित के पति मनोज कुमार को सोनिया विहार से 25 और 26 अप्रैल की दरम्यानी रात को गिरफ्तार किया गया है। मनोज पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी पर 22 अप्रैल को चाकू से हमला किया। मनोज ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने पारिवारिक विवाद की वजह से अपनी पत्नी पर चाकू से हमला किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि शिकायत में कहा गया है कि महिला वकील के ससुराल वाले उसके दो नाबालिग बच्चों को अपने साथ ले गए हैं और उनका कुछ अता-पता नहीं है। कोर्ट ने दोनों नाबालिग बच्चों का पता लगाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी को इस मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
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