दुमका। दुमका लोकसभा के पूर्व सांसद व भाजपा नेता सुनील सोरेन ने हुल पर दोटूक शब्दों में कहा कि आज के दौर में झारखंड को बिल्कुल एक और ‘हूल’ (क्रांति) की जरूरत है। सुनील सोरेन ने आगाह किया कि जब तक हमारी वैचारिक क्रांति और संघर्ष की मशाल नहीं जलेगी, तब तक आदिवासियों का अस्तित्व और उनकी पहचान सुरक्षित नहीं रह पाएगी।
पूर्व सांसद ने संताल विद्रोह के अमर नायकों को याद करते हुए कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने अपनी माटी, संस्कृति, धर्म और जमीन को बचाने के लिए अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ महासंग्राम छेड़ा था। उन्होंने कहा, “हमारे वीर पुरखों ने जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, लेकिन विदेशी हुकूमत से कभी समझौता नहीं किया।”
सुनील सोरेन ने मौजूदा हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज 2026 में भी आदिवासियों के सामने अपनी पहचान को बचाए रखने का बड़ा संकट खड़ा है। उन्होंने आह्वान किया कि आदिवासियों को अपनी अस्मिता, अपनी अनूठी संस्कृति और अपने मूल धर्म की रक्षा के लिए आने वाले समय में एकजुट होकर एक और बड़ी क्रांति का बिगुल फूंकना होगा, तभी पुरखों के सपनों का समृद्ध झारखंड सुरक्षित रह सकेगा।
सुनील सोरेन, पूर्व सांसद, दुमका


