साहिबगंज | जिले के बड़े सदर अस्पताल की विधि व्यवस्था चरमरा गई है.स्वास्थ्य सुविधाओं की बात की जाए तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है. सरकार के द्वारा लाख दावा किया जाता है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है.पर अंदर की बात यह है कि सदर अस्पताल में मरीजो को उपलब्ध कराई गई लाखों रुपए की स्लाइल को सरकारी बाबुओं के द्वारा नाली में बहाया जा रहा है| सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वेयरहाउस के निचले तले के कमरे में रखे लगभग 23 से 25 हजार स्लाइल की बोतल को मजदूर लगाकर स्लाइल की बोतल को काटकर पानी को नाले में बहा दिया गया विभाग के अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी. वेयरहाउस के कमरे में बड़ी संख्या में रखी स्लाइल की बोतल का निबटारा करने में सरकारी बाबुओं को 7 से लगभग 8 दिन का समय लगा सूत्रों के अनुसार मजदूरों को सुबह में स्लाइल रखे कमरे में घुसा कर गेट के दरवाजा पर बाहर से ताला लगा दिया जाता था. और शाम में बंद कमरे से मजदूर संबंधित बाबुओं को फोन करते थे.तब कमरे का दरवाजा को खोल दिया जाता था तब मजदूर स्लाइल की पानी को नाले में बहा कर अपने घर चले जाते थे फिर दूसरे दिन मजदूर अपने काम में लग जाते थे. कमरे में रखे सालन की बोतल को नष्ट करने में मजदूरों को 7 से 8 दिन लगा जहां सिविल सर्जन समेत कई अधिकारियों का आना-जाना वेयरहाउस में लगा रहता था पर किसी को भनक तक नहीं लगी | बेयर हाउस में जब तक सरकारी बाबुओं के द्वारा इस तरह की घटना को अंजाम दिया जा रहा था तो सदर अस्पताल आने-जाने वाले वाहनों वह लोगों पर एक कर्मचारी नजर रखते थे.कौन आ रहा है कौन जा रहा है जब तक काम को अंजाम तक पहुंचा दिया तो बबुओ ने चैन की सांस ली सदर अस्पताल के कुछ कर्मचारियों को समझ में नहीं आ रहा है जनता के पैसों को क्यों इस तरह बर्बाद किया जा रहा है. अस्पताल में मरीजो को स्लाइल कभी-कभी नहीं मिलती है तो मरीजो के परिजन मेडिकल से पैसे लगाकर स्लाइल खरीदने हैं फिर जाकर उनकी जान बच पाती है|
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