● 2008 में शुरू हुआ सफर : नौ दीक्षांत समारोहों में राष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्री और कई राज्यपालों ने बढ़ाई विश्वविद्यालय की गरिमा।
● इतिहास के पन्नों में खास नाम: प्रणब मुखर्जी, द्रौपदी मुर्मू और संतोष कुमार गंगवार की मौजूदगी ने बनाया दीक्षांत समारोहों को यादगार।
● 10वें दीक्षांत पर टिकी निगाहें: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे मेधावियों को सम्मानित, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो होंगे विशिष्ट अतिथि।
नौ दीक्षांत समारोहों का शानदार इतिहास, अब दसवें में मेधावियों को मिलेगा सम्मान
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से लेकर द्रौपदी मुर्मू और संतोष कुमार गंगवार तक की रही गरिमामयी मौजूदगी
ब्यूरो रिपोर्ट
दुमका । संताल परगना क्षेत्र में उच्च शिक्षा की अलख जगाने वाला सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय अपने इतिहास के एक और नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है। वर्ष 1992 में स्थापित यह प्रमुख विश्वविद्यालय अब अपने दसवें दीक्षांत समारोह के आयोजन की ओर अग्रसर है।
अपनी स्थापना के 33 वर्षों में इस विश्वविद्यालय ने संपूर्ण उत्तरी झारखंड के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में दुमका के साथ-साथ गोड्डा, पाकुड़, देवघर, साहिबगंज एवं जामताड़ा जिलों के अनेक महाविद्यालय और शिक्षण संस्थान इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध होकर युवाओं का भविष्य संवार रहे हैं।
विश्वविद्यालय की इस लंबी शैक्षणिक यात्रा में दीक्षांत समारोह हमेशा से एक गौरवपूर्ण परंपरा रही है। अब तक यहाँ नौ दीक्षांत समारोह सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं। इन समारोहों का इतिहास बेहद शानदार रहा है; विभिन्न अवसरों पर देश के राष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्री और झारखंड के राज्यपाल जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए विद्यार्थियों को उपाधि और पदक प्रदान किए हैं। अब एक बार फिर विश्वविद्यालय अपने 10वें दीक्षांत समारोह के ऐतिहासिक आयोजन के लिए तैयार हो रहा है।
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मार्च 2008 में हुआ पहला दीक्षांत समारोह
डिग्रियों का वितरण ही नहीं, बल्कि मेधा, मेहनत और उपलब्धियों के सम्मान का उत्सव है सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह। वर्ष 2008 में शुरू हुआ यह गौरवशाली सफर अब दसवें पड़ाव पर पहुंचने जा रहा है। इन 18 वर्षों में विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोहों में देश के राष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्री और झारखंड के राज्यपाल जैसी प्रतिष्ठित हस्तियां शिरकत कर चुकी हैं।
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प्रणब मुखर्जी से जुड़ा गौरवशाली अध्याय
विश्वविद्यालय का पहला दीक्षांत समारोह मार्च 2008 में तत्कालीन कुलपति प्रो. विक्टर तिग्गा के कार्यकाल में हुआ था। तत्कालीन राज्यपाल सिब्ते रजी ने विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए। इसके बाद 2011, 2012 और 2013 में लगातार तीन वर्षों तक दीक्षांत समारोह आयोजित हुए। वर्ष 2011 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी मुख्य अतिथि बने, जबकि 2013 में राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए।
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द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी भी बनी यादगार
पांचवें दीक्षांत समारोह में तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने विद्यार्थियों को पदक प्रदान किए। बाद में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचीं द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति विश्वविद्यालय के इतिहास का खास अध्याय बन गई।
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कोरोना काल में भी नहीं टूटी परंपरा
कोरोना महामारी के बाद भी विश्वविद्यालय ने अपनी दीक्षांत परंपरा को जारी रखा। वर्ष 2022 में छठे और मार्च 2023 में सातवें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस ने की। सितंबर 2024 में आठवां और 17 नवंबर 2025 को नौवां दीक्षांत समारोह राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
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दसवें दीक्षांत पर खास होगा आयोजन
अब विश्वविद्यालय दसवें दीक्षांत समारोह को यादगार बनाने की तैयारी में जुटा है। राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार मेधावी विद्यार्थियों को मेडल और डिग्री प्रदान करेंगे। झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
कुलपति प्रो. डॉ कुनूल कंदीर तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रही हैं। वहीं कुलसचिव डॉ. अब्दुस सत्तार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ. रीना नीलिमा लकड़ा के अनुसार, मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का निबंधन 4 नवंबर को दुमका के कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसकी जिम्मेदारी परीक्षा विभाग के ओएसडी डॉ. इंद्रनील मंडल को सौंपी गई है।
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सिर्फ समारोह नहीं, उपलब्धियों का उत्सव
नौ दीक्षांत समारोहों की यह यात्रा एसकेएमयू दुमका के शैक्षणिक विकास और बदलते स्वरूप की कहानी बयां करती है। अब दसवां समारोह विश्वविद्यालय की इस गौरवशाली परंपरा में नया अध्याय जोड़ने को तैयार है। विद्यार्थियों के लिए यह सिर्फ डिग्री हासिल करने का अवसर नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत को सम्मान मिलने का यादगार पल होगा।


