राज्य और राजनीति
चंदन मिश्र
झारखंड में देश के साथ नई जनगणना की प्रक्रिया शुरू होनेवाली है। आरंभिक प्रक्रिया को झारखंड सरकार के कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। भारत सरकार की अधिसूचना के आलोक में झारखंड सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया में सरना कोड को शामिल नहीं किया गया है। जनगणना के पहले जातीय गणना होगी और जातीय गणना में आदिवासी समुदायों की गिनती के लिए सरना धर्म कोड का कॉलम नहीं होगा।
झारखंड के सरना आदिवासियों की लंबे समय से चली आ रही सरना धर्म कोड को जातीय गणना में शामिल करने की मांग फिर सिरे से खारिज ही मानी जाएगी। जातीय गणना के लिए सरकार जल्द ही अधिसूचना जारी करेगी। झारखंड सरकार ने सरना कोड लागू करने के इस प्रस्ताव को विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भी भेजा था। अब यह दिखाने की राजनीति थी या जनदबाव, लेकिन हकीकत यही है कि राज्य की इंडिया गठबंधन की सरकार ने बड़ी शिद्दत से इसे लागू करने की मांग की है। केंद्र सरकार सरना कोड को जनगणना की शामिल करेगी या नहीं, यह अभी तक साफ नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार के अब तक के रवैए से यह स्पष्ट है कि इस जनगणना के पूर्व होनेवाली जातीय गणना में सरना कोड को शामिल नहीं करने जा रही है।
व्यवहारिक तौर पर देखें तो यह एक ऐसा फैसला होगा जो केंद्र सरकार के लिए स्वीकार करना बहुत कठिन होगा। एक धर्मावलंबी समुदाय की मांग मानने पर देश में सैकड़ों ऐसे समुदाय सामने आएंगे, जो अपने – अपने धर्म को जनगणना सूची में शामिल करने की मांग उठा देंगे। तब देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। सरना धर्म कोड लागू करने की मांग पिछले कई बरसों से की जा रही है। इस बार नई बात यह है कि झारखंड सरकार ने विधानसभा से इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित कर इसे केंद्र सरकार को भेज दिया। लेकिन हर राजनीतिक दल के नेताओं को हकीकत पता है। वे सभी जानते हैं कि केंद्र सरकार अलग से सरना धर्म कोड नहीं दे पाएगी। उसके लिए यह संभव नहीं है, लेकिन यह राजनीतिक दांव है। सत्ता में रहने के लिए राजनीतिक दल ऐसा दांव खेलते हैं। झारखंड में स्थानीय नीति को 32 के खतियान के आधार बनाने का प्रस्ताव भी राजनीतिक ही था, इसलिए कोर्ट ने इसे शुरू में ही खारिज कर दिया था। फिर दुबारा इसे विधानसभा से पारित कराकर केंद्र को भेजने की प्रक्रिया दोहराई गई। लेकिन परिणाम पूर्ववत ही रहा। बहरहाल सरना कोड के मसले पर सरकार की किसी तरह की पहल नहीं होने के बाद समाज की प्रतिक्रिया देखनी होगी। यह कितना संवैधानिक होगा, यह जानना भी जरूरी होगा।
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