अयोध्या । अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस घटना का खुलासा एक वीडियो के माध्यम से हुआ था, जिसमें गणना कक्ष के बाथरूम में नोटों की गड्डियां दिखाई दे रही थीं। चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून को गणना कर्मी आनंद चौधरी ने दिल्ली से अयोध्या ट्रेन से आ रहे रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपतराय को मोबाइल पर यह वीडियो और संदेश भेजकर चोरी की जानकारी दी थी। चंपतराय के निर्देश पर हुई जांच में बाथरूम से 2.25 लाख रुपये बरामद किए गए थे।
चार्जशीट में आगे बताया गया है कि 5 जून को चंपतराय के अयोध्या पहुंचने के बाद उनके आवास पर अनिल मिश्रा, गोपालराव और नरेंद्र ने लैपटॉप पर वह वीडियो देखा। गणना कर्मी मदन गोपाल निगम ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 3 जून को ड्यूटी के दौरान उन्हें करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा पर संदेह हुआ था। आरोप है कि ये लोग मेज के नीचे से नोटों की गड्डियां निकालकर अपनी कमर में छिपाते थे। पुलिस ने अपनी जांच में मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डाटा और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को अहम साक्ष्य बनाया। डिलीट किए गए फुटेज को भी विशेषज्ञों की मदद से सफलतापूर्वक रिकवर किया गया। चार्जशीट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में अविनाश शुक्ला 85 बार चढ़ावा राशि हटाकर अपने पास रखते और चार बार अन्य लोगों को रकम हटाने में मदद करते दिखाई दिए। करुणेश पांडेय भी दो बार रकम हटाते हुए कैमरे में कैद हुए।
इस मामले में नियुक्तियों की भी जांच की गई है। चार्जशीट के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा ने वर्ष 2025 में एसबीआई सैनिक सिक्योरिटी सर्विस से संपर्क कर लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय और अविनाश शुक्ला को गणना कर्मी के रूप में नियुक्त कराया था। बाद में रामशंकर यादव के भतीजे मनीष यादव को भी गणनाकर्मी नियुक्त कराया गया। पुलिस ने सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव टिन्नू पर भी लोकसेवक से संबंधित धाराएं लगाई हैं। चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ और उनकी निशानदेही पर चोरी से बची रकम, अन्य मुद्रा तथा आभूषण बरामद किए गए। यह माल चंपतराय, गोपाल और ट्रस्ट के अन्य कर्मियों की मौजूदगी में सौंपा गया था। एक सहमति पत्र और सुपुर्दगीनामा तैयार कर बरामद माल को ट्रस्ट के लॉकर कक्ष में रखा गया, जहां यह एफआईआर दर्ज होने तक 21 दिनों तक चंपतराय की सुपुर्दगी में रहा। बाद में पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के बाद लॉकर से यह सारा माल अपने कब्जे में ले लिया। सुभाष श्रीवास्तव ने पूछताछ में बताया कि उसे मिली रकम खर्च हो चुकी थी।


