राज्य और राजनीति
चंदन मिश्र
झारखंड में पांच सालों के बाद निकाय चुनाव हो रहे हैं। शहर की सरकार बनाने के लिए शहरी नागरिकों से ज्यादा सूबे के राजनीतिक दल सक्रिय हो चुके हैं। हालांकि निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहे हैं, फिर भी राजनीतिक दलों का इस चुनाव में सीधा हस्तक्षेप देखा जा रहा है। नतीजतन राज्य के नौ नगर निगम के अंदर एनडीए और इंडिया गठबंधन की सीमाओं को तोड़ते हुए हर दल के एक से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। यानी दलों के अंदर ही नूरा-कुश्ती देखने का अवसर मिलेगा।
वैसे भी कोई भी चुनाव बिना राजनीतिक दल के शामिल हुए बिना हो ही नहीं सकता। लिहाजा झारखंड में होनेवाला निकाय चुनाव सत्तारूढ़ दलों के साथ-साथ विपक्षी दलों के लिए शक्ति परीक्षण का बड़ा खेल होगा। 2025 के विधानसभा के चुनाव हुए लगभग सवा साल होने वाले हैं। झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन ने बड़ी जीत हासिल कर राज्य की सत्ता में लगातार दूसरी बार काबिज हुई है। उसके बावजूद झारखंड में होनेवाले शहरी सरकार के चुनाव एक बार फिर से राजनीतिक दलों की ताकत की जोर आजमाइश होगी। इसकी तैयारी अंतिम रूप से शुरू हो चुकी है। झारखंड में नौ नगर निगम हैं। इनमें सभी पांचों प्रमंडल के मुख्यालय शामिल हैं। रांची, धनबाद,चास, हजारीबाग, दुमका, देवघर, गिरिडीह, मेदिनीनगर, जमशेदपुर के मानगो और आदित्यपुर जैसे शहर शामिल हैं। इन शहरों में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान दलों को वोटरों ने अपना समर्थन दे दिया है। लेकिन विधानसभा और लोकसभा से नगर निकाय चुनाव भिन्न होता है। इसमें शहरी और अर्ध शहरी क्षेत्र के आम नागरिक स्थानीय समस्याओं को लेकर अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। इसलिए यहां हर प्रतिनिधि को वोटर अच्छी तरह से वाकिफ होते हैं।
झारखंड में झामुमो के सबसे बड़े दल और सत्तारूढ़ दल होने के कारण सबसे अधिक दबदबा है। लेकिन शहरी क्षेत्रों में भाजपा के वोटर अपेक्षाकृत ज्यादा हैं। इसलिए पिछले निकाय चुनावों में भाजपा के समर्थित प्रतिनिधि ज्यादा चुनकर आए थे। यहां तक कि प्रमुख नगर निगमों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार मेयर बने। नगरपालिका और नगर पंचायत के अधिकतर प्रतिनिधि भाजपा समर्थित ही जीते। गौर करनेवाली बात है कि 2015 और 2016 के निकाय चुनाव के दौरान झारखंड में भाजपा की सरकार थी। चुनाव में सरकार होने का लाभ और दबदबा अलग से दिखाई पड़ा। इस बार भी सभी नौ नगर निगमों में सत्तारूढ़ झामुमो का दबदबा दिखेगा या नहीं, यह तो चुनाव और चुनाव परिणाम बताएगा, लेकिन सत्तारूढ़ दल होने का लाभ झामुमो समर्थित उम्मीदवारों को मिलना तय है।
भाजपा ने नगर निकाय चुनाव को पूरी शिद्दत के साथ लड़ने की ठानी है। इसलिए भाजपा नगर निगम से लेकर वार्ड पार्षद तक के संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर समर्थन देने की तैयारी कर रही है। भाजपा के नए नेतृत्व को लेकर यह बहुत बड़ी चुनौती है। अभी अभी भाजपा ने अपना नया प्रदेश अध्यक्ष चुना है। झारखंड के आदित्य साहु के लिए झारखंड का निकाय चुनाव पहली अग्नि परीक्षा साबित होगी। उनके नेतृत्व क्षमता का परीक्षण होगा। इसलिए आदित्य साहु अपनी पूरी टीम के साथ चुनाव में पूरी ताकत झोंकने को तैयार हैं।
निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ दलों में कांग्रेस कुछ स्थानों पर मजबूत स्थिति में दिखाई दे तरह है और पार्टी के नेता जोर शोर से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गए हुए हैं। रांची नगर निगम क्षेत्र की प्रत्याशी कांग्रेस की नेता रमा खलखो मेयर का चुनाव पहले जीत चुकी हैं। इस बार वह फिर चुनाव मैदान में दिखाई पड़े रहीं। लेकिन झामुमो की अंदरूनी इच्छा है कि उनका उम्मीदवार इस बार रांची के मेयर पद को सुशोभित करे। अब देखना दिलचस्प होगा कि रांची में दोनों सत्तारूढ़ दलों में किसका उम्मीदवार अंतिम तौर पर मैदान में उतरता है। कांग्रेस पार्टी समर्थित एक और उम्मीदवार चुनाव मैदान में दिखाई दे सकता है। जमशेदपुर के एक नगर निगम से पूर्व हेमंत सरकार की कैबिनेट में मंत्री रहे बन्ना गुप्ता की पत्नी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं। धनबाद से झामुमो समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतरनेवाली हैं। इसी तरह दुमका में भी झामुमो समर्थित उम्मीदवार मैदान में आ सकता है।
हर नगर निगम में दलीय समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतर चुके हैं और इनमें कई हेवीवेट रह चुके हैं। चुनाव रणनीति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, सरकार के मंत्री, विधायक, सांसद और विपक्ष की ओर से पार्टी अध्यक्ष सहित सांसद विधायक चुनावी गोटी बिछाने में जुट गए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव की इस शतरंजी चाल में किसकी जीत होती है और किसकी मात। लेकिन इतना तय है कि सूबे के निकाय चुनाव में एक – एक निकाय में हर दल के एक से ज्यादा उम्मीदवार अपनी पार्टी के नेताओं के साथ आपस में गुत्थम गुत्था होते दिखाई देंगे। हालांकि यह तय है कि जो उम्मीदवार अपने परिवार की लड़ाई से उबर पाएंगे, वही अपने प्रतिद्वंद्वियों पर जीत हासिल करेंगे। कुल मिलाकर इस बार सूबे में नगर निकाय का चुनाव बहुत दिलचस्प होगा।


