मिठाई व्यापारी बोले- हर बार तारीख बदलकर स्टिकर लगाना एक बड़ी चुनौती
देहरादून । दिवाली के त्योहारी सीजन से ठीक पहले खुले में बिकने वाली मिठाइयों पर यूज बाई डेट या इस्तेमाल की अंतिम तारीख लिखना अनिवार्य होगा। उत्तर प्रदेश में यह नियम 15 अक्टूबर से लागू हो गया है, जबकि उत्तराखंड में 26 अक्टूबर से खुली मिठाइयों और बेकरी उत्पादों पर भी निर्माण और एक्सपायरी तिथि अंकित करना अनिवार्य होगा। इस नए नियम से मिठाई विक्रेता, विशेषकर छोटे हलवाई, खासे चिंतित हैं, जबकि ग्राहकों के लिए यह एक अच्छा कदम है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मिठाई विक्रेताओं का कहना है कि त्योहारों के दौरान बिक्री बहुत तेज होती है। ऐसे में हर बार तारीख बदलकर स्टिकर लगाना एक बड़ी चुनौती है। उनका तर्क है कि पहले से ही कर्मचारियों की कमी है और यह अतिरिक्त काम उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। व्यापारी संगठनों ने खाद्य विभाग से अपील की है कि वे इस नियम को लागू करने के लिए थोड़ा और समय दें। विभाग का रुख स्पष्ट है कि नियम त्योहारों के बाद लागू करने का मतलब उसकी सार्थकता खो देना होगा।
यह नियम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अभी तक ग्राहक मिठाई खरीदते समय दुकानदार के आश्वासन पर ही निर्भर रहते थे कि मिठाइयां ताज़ा हैं। दूध या छेने से बनी मिठाइयां एक-दो दिन में ही खराब हो जाती हैं, जबकि अन्य मिठाइयों की शेल्फ लाइफ भी सीमित होती है। अब ग्राहकों को यह जानने का अधिकार होगा कि वे कब बनी हुई और कब तक खाने योग्य हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह नियम कोई नया नहीं है। केंद्र सरकार की खाद्य नियामक इकाई एफएसएसएआई ने 2020 में ही खुले में बिकने वाली मिठाइयों पर तारीख लिखने का नियम बनाया था।
हालांकि, तब देशभर के दुकानदारों के भारी विरोध के कारण यह नियम लागू नहीं हो पाया और 2023 में इसे वापस ले लिया गया। अब यूपी और उत्तराखंड ने इसे फिर से लागू कर एक मिसाल कायम की है। हालांकि यह साफ नहीं हो सका है कि किस मिठाई को कितने दिन तक ताजा माना जाएगा, यह तय करने की जिम्मेदारी दुकानदारों पर है। विभाग का कहना है कि यह नियम जागरूकता बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद करेगा।


