विगत चार चुनावों से राजद के सुरेश पासवान लड़ रहे थे इस क्षेत्र से
– शत्रुघ्न प्रसाद
देवघर । विधान सभा चुनाव को लेकर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। यही हाल देवघर का भी है। सभी पार्टियों ने अपने – अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी है। परसों कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ‘ संवाद आपके साथ ‘ कार्यक्रम के लिए देवघर आए थे । उसमें पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख, ओबीसी विभाग के प्रमुख अभिलाष साहू , सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर गजेंद्र सिंह , जिला 20 सूत्री के उपाध्यक्ष मुन्नम संजय , जिलाध्यक्ष प्रो उदय प्रकाश और पार्टी जिला संगठनके अग्रणी मोर्चा, विभागों ,प्रकोष्ठों आदि के प्रमुख मौजूद थे। उस कार्यक्रम में एक स्वर से देवघर और सारठ विधान सभा क्षेत्र में कांग्रेस के लड़ने की बात उठी। दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है , यह भी दावा किया गया । बता दें कि देवघर से इंडिया गठबंधन का घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) चुनाव लड़ता आ रहा है। 2009 में राजद के सुरेश पासवान यहाँ से विधायक रह चुके हैं। वे मंत्री भी रह चुके हैं । लेकिन 2014 और 2019 में भारतीय जनता पार्टी के नारायण दास के सामने पराजय मिली है। इसी कारण कांग्रेस इस सीट पर अपना दावा ठोक रही है ।
2009 के देवघर विधान सभा चुनाव में विभिन्न पार्टियों से 15 उम्मीदवार मैदान में थे। 288569 मतदाताओं वाले इस विधान सभा चुनाव क्षेत्र से राजद के सुरेश पासवान को 49602 मत मिले थे। दूसरे स्थान पर 31862 मत पाकर झारखंड विकास मोर्चा के बलदेव दास, तीसरे स्थान पर 13909 मत पाकर जनता दल यू के कामेश्वर नाथ दास रहे। कुल 136267 मत पड़े थे । 17740 मतों से सुरेश पासवान को जीत हासिल हुई थी। यही सुरेश पासवान 2005 में 33442 मत पाकर जदयू के कामेश्वर नाथ( 43065 मत ) से पराजित हुए थे । 2009 की जीत के बाद उन्हें 2014 और 2019 में हार का मुंह देखना पड़ा था ।
2014 में भारतीय जनता पार्टी ने नारायण दास को अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्हें 92022 (42.42% ) मत मिले थे । इस चुनाव में एक दर्जन उम्मीदवार अपनी-अपनी किस्मत आजमा रहे थे। नोटा का भी प्रावधान था । इसमें सुरेश पासवान 46870 (21.6%) मत मिले थे । झारखंड मुक्ति मोर्चा की निर्मला भारती 23459 (10.81%) मत पाकर तीसरे स्थान पर रही थीं । नारायण दास ने 45152 मतों से जीत हासिल की थी । लेकिन नारायण दास के लिए 2019 का चुनाव आसान नहीं था। हालांकि सुरेश पासवान दूसरे स्थान पर रहे थे , लेकिन इस चुनाव की मतगणना में एक ऐसा भी दौर आया था, वे जीत के मुहाने पर पहुँच चुके थे। मगर आखिरी दौर में उन्हें हार मिली थी। जीत के अंतर से आप इस बात को समझ सकते हैं । नारायण दास को 95491 (41.01%) मत मिले थे , जबकि सुरेश पासवान को 92867(39.88%) मत मिले थे । नारायण दास सिर्फ 2624 मतों से जीते थे ।
सुरेश पासवान को लगातार दो बार पराजय मिली है । इसी कारण कांग्रेस इस सीट पर अपना दावा कर रही है । कांग्रेस के इस दावे पर प्रतिक्रिया के लिए जब सुरेश पासवान से संपर्क करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो सका। यह सही है कि इस गठबंधन का एक मजबूत घटक कांग्रेस है । अब देखना है कि उसके दावे को गठबंधन में स्वीकृति मिलती है या नहीं ।


