चरणबद्ध तरीके के राज्य में बनाएंगे अबुआ आवास: दीपिका पांडे
रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन बुधवार को लिट्टीपाड़ा के विधायक हेमलाल मुर्मू ने प्रश्नकाल के दौरान अबुआ आवास योजना और पीडब्ल्यूडी टेंडर प्रक्रिया को लेकर सरकार से कई अहम सवाल पूछे। हेमलाल मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2024-25 के लिए राज्य में अबुआ आवास योजना के तहत 6 लाख 50 हजार आवास का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 6,43,106 आवासों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से मात्र 18,849 आवास ही पूर्ण हो सके हैं। शेष आवासों को वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का प्रस्ताव है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इन आवासों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की योजना है।
विधायक ने कहा कि पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत राज्य में आवास निर्माण तेजी से हो रहा था, लेकिन बाद में इसकी गति धीमी पड़ गई। ग्रामीणों की जरूरत को देखते हुए राज्य सरकार ने अबुआ आवास योजना शुरू की, जिसके लिए करीब 22 लाख लोगों ने आवेदन किया। इसके बाद 16 लाख आवासों की मांग सामने आई, जबकि फिलहाल करीब 6.5 लाख आवासों पर काम चल रहा है।
इसका जवाब देते हुए ग्रामीण विकास विभाग की मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लगभग 5 लाख 40 हजार आवास, अबुआ आवास योजना से 1 लाख 71 हजार 300 आवास, पीएम जनमन योजना से 26 हजार और बाबा साहेब अंबेडकर आवास योजना से 16 हजार आवास स्वीकृत हुए हैं। इस प्रकार संथाल परगना में करीब 7.5 लाख आवास स्वीकृत हुए, जिनमें से लगभग 5 लाख पूरे किए जा चुके हैं।
हेमलाल मुर्मू ने मांग की कि संथाल परगना के सभी जिलों में वास्तविक लाभुकों की पहचान के लिए सर्वे और आकस्मिक जांच कराई जाए, ताकि गलत लोगों को आवास का लाभ न मिले। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रति यूनिट राशि 1.20 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मांग को और मजबूती से उठाने की बात कही।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि राज्य में अभी भी करीब 20 लाख आवासों की आवश्यकता है। केंद्र सरकार से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रति यूनिट राशि बढ़ाने की मांग लगातार की जा रही है। राज्य सरकार अपने संसाधनों से अबुआ आवास योजना के तहत प्रति यूनिट 2 लाख रुपये दे रही है और इस वर्ष के बजट में इसके लिए 4,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मंत्री ने बताया कि सही लाभुकों की पहचान के लिए सर्वेक्षण कराया जा रहा है। राज्य स्तर पर 1 लाख 91 हजार लाभुकों की रैंडम जांच की गई है, जबकि संथाल परगना प्रमंडल में 2 लाख 65 हजार लाभुकों का सर्वे और सत्यापन पूरा किया जा चुका है।
इस दौरान हेमलाल मुर्मू ने पीडब्ल्यूडी कोड के तहत टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पूछा कि पिछले एक वर्ष में कितने टेंडर निष्पादित हुए और कितने लंबित हैं तथा तकनीकी मूल्यांकन की समय सीमा क्या है। इस पर मंत्री ने कहा कि 5 करोड़ रुपये तक की योजनाओं का निष्पादन मुख्य अभियंता और उससे अधिक राशि की योजनाओं का निष्पादन अभियंता प्रमुख की अध्यक्षता वाली निविदा समिति द्वारा किया जाता है। टेंडर प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए विभाग ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि लंबित टेंडरों के निष्पादन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और अगले 20 दिनों के भीतर इन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही पीडब्ल्यूडी कोड के पुराने प्रावधानों की समीक्षा कर आवश्यक बदलाव भी किए जाएंगे, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।


