अयोध्या । राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज पहली एफआईआर में कुल 8 आरोपियों को नामजद किया गया है। मामले के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपियों में से दो अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों से पूछताछ जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।
मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम भी सामने आया है, वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है। सूत्रों के अनुसार मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इस पूरे मामले में अहम सबूत बनी है, जिसमें कुछ संदिग्ध लोग चढ़ावे की राशि चुराते हुए दिखाई दिए हैं। इसी आधार पर पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया है। पुलिस ने बाकी बचे आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित कर दी हैं। प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।
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पीएमओ ने ट्रस्ट से मांगा था चंदे का हिसाब, चंपत राय ने जांच का हवाला देकर कर दिया इनकार
लखनऊ । अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे में हेराफेरी व चोरी मामले अब नया खुलासा हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जिला प्रशासन को संदर्भित पत्र पर एसआइटी जांच का हवाला देते हुए वित्तीय जानकारी देने से इन्कार कर दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने अयोध्या के स्थानीय भाजपा नेता रजनीश सिंह के द्वारा लिखे गए पत्र पर जब जिला प्रशासन ने राममंदिर ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी तो जांच का हवाला देकर ट्रस्ट ने आए हुए संपत्ति का विवरण देने से मना कर दिया। भाजपा नेता रजनीश सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन चंदा चढऩा और जमीन खरीद फरोख्त में गड़बडिय़ों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। रजनीश सिंह ने पीएमओ से मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की जानकारी सार्वजनिक करे। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर भाजपा के स्थानीय नेता डा. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यलय को दो बार पत्र लिखा। रजनीश सिंह ने पहली बार नौ जून को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था।
उन्होंने मांग की थी कि मंदिर ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपनी शुरुआत से लेकर अब तक के वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे। इसके बाद दूसरी बार उन्होंने 12 जून को एक और पत्र लिखकर राम मंदिर के चढ़ावा को सार्वजनिक करने की मांगी की। 13 जून को एसआईटी गठित कर दी गई थी। पीएमओ ने मांगा ट्रस्ट के चंदे का हिसाब भाजपा नेता के पत्र को संज्ञान में लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यलय (पीएमओ) ने जिला प्रशासन को संदर्भित किया। पीएमओ को मिली शिकायत के लिए अयोध्या जिला प्रशासन को भेजा गया था। जिला प्रशासन ने इस मामले को लेकर श्रीराम मंदिर ट्रस्ट से संपर्क किया। सूत्रों की मुताबिक 23 जून को अयोध्या के एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को लिखे एक पत्र में एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने पीएमओ द्वारा शिकायत में मांगी गई जानकारी के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के चंपतराय से संपर्क किया था।
चंपत राय ने नहीं दिया चंदे का हिसाब अयोध्या एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी के मुताबिक चंपत राय ने यह कहकर कुछ भी जानकारी देने से मना कर दिया कि फिलहाल एसआईटी जांच चल रही है और जांच पैनल सभी जरूरी रिकार्ड और जानकारी इकट्टाकर रहा है। इसीलिए अभी मांगी गई जानकारी नहीं दी जा सकती। पीएमओ को भाजपा के नेता रजनीश सिंह के द्वारा भेजी गई शिकायत में कई जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इनमें समर्पण निधि अभियान के जरिए इकट्टाकिए गए कोष, अलग-अलग तरीकों से मिले दान, सोना, चांदी और गहनों के रूप में मिले योगदान, बैंक खाते और वित्तीय लेन-देन, जमीन की खरीद-बिक्री, मंदिर निर्माण और प्रशासन पर खर्च, और आडिट व निरीक्षण रिपोर्ट शामिल हैं।
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राम मंदिर चढ़ावा मामले में जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इंकार
नई दिल्ली । अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी और गबन की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने जल्द सुनवाई से इंकार कर सोमवार को फिर से अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मेंशन करने को कहा है। याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जी की गंभीरता को देखकर जल्द सुनवाई की मांग कर कहा कि इस मामले में तुरंत आदेश जारी करने की जरूरत है। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि सोमवार को एक बार फिर जल्द सुनवाई की मांग करें। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े घोटाला मामले में जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। इस मामले में सबसे पहले आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सीबीआई की एसआईटी से जांच की मांग गई है। दो वकीलों की तरफ से दायर यचिका में मांग की गई है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पैसों में गड़बड़ी के आरोपों की एफआईआर दर्ज की जाए। सीबीआई की अगुवाई में एसआईटी बनाकर निष्पक्ष, समयबद्ध जांच कराई जाए, जिससे यह पता चल सके कि दान के पैसों में कोई गड़बड़ी, गबन या भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं। याचिका में यह भी कहा कि कोर्ट के द्वारा रामजन्मभूमि ट्रस्ट और यूपी सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वो ट्रस्ट के फंड और संपत्तियों की निगरानी के लिए मजबूत ऑडिट और जांच व्यवस्था बनाए, जिससे भविष्य में ऐसी शिकायतें न हों। मांग की गई है कि कोर्ट यूपी सरकार और ट्रस्ट को निर्देश दे कि जांच पूरी होने तक सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, जैसे बैंक खाते, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, कंप्यूटर डेटा। इसके साथ ही, किसी भी रिकॉर्ड या सबूत को नष्ट करने या उसमें छेड़छाड़ करने पर रोक लगाई जाए। आशीष दुबे / 26 जून 2026


