यह दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय और जमीन पर करेगा सटीक हमले
नई दिल्ली । भारत का महत्वाकांक्षी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय वायुसेना के लिए विकसित किए जा रहे इस पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एएमसीए को डिजाइन करते समय दुनिया के अन्य आधुनिक लड़ाकू विमानों, विशेष रूप से अमेरिकी एफ-35 से जुड़े अनुभवों और चुनौतियों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित किए जा रहे एएमसीए का उद्देश्य ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जो युद्धक्षेत्र में उच्च विश्वसनीयता, कम रखरखाव लागत और बेहतर परिचालन क्षमता प्रदान करे। एएमसीए में इंटीग्रेटेड व्हीकल हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाएगा, जो विमान के विभिन्न सिस्टमों की निगरानी करेगा। इसका उद्देश्य संभावित तकनीकी समस्याओं का पहले से पता लगाना और रखरखाव की जरुरत को कम करना है। इससे विमान की परिचालन उपलब्धता बढ़ेगी और वह ज्यादा समय तक मिशन के लिए तैयार रहेगा।
एएमसीए को इस तरह बनाया जा रहा है कि वह उड़ान के दौरान विमान की आंतरिक प्रणालियों और बाहरी परिस्थितियों का सूक्ष्म स्तर पर विश्लेषण कर सके। यह थर्मल व्यवहार, हाइड्रोलिक दबाव और इलेक्ट्रॉनिक संकेतों जैसे अनेक तकनीकी मानकों की निगरानी करेगा। एआई आधारित एल्गोरिद्म की मदद से यह विमान संभावित खतरों और दुश्मन की गतिविधियों का तेजी से आकलन कर सकेगा, जिससे पायलट को फैसला लेने में मदद मिलेगी।
एएमसीए को ट्विन-इंजन, मीडियम-वेट और मल्टीरोल स्टील्थ लड़ाकू विमान के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह हवाई श्रेष्ठता मिशन, गहरे क्षेत्र में हमला, दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करने और सटीक जमीनी हमले करने में सक्षम होगा। विमान में इंटरनल वेपन बे, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, सुपरक्रूज क्षमता और एआई आधारित मिशन मैनेजमेंट सिस्टम शामिल होंगे। अनुमान है कि यह करीब 55,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकेगा और आंतरिक हथियार कक्ष में करीब 1,500 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम होगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक एएमसीए केवल एक लड़ाकू विमान परियोजना नहीं है, यह भारत के भविष्य के एयरोस्पेस कार्यक्रमों के लिए तकनीकी आधार भी तैयार करेगा। इस परियोजना के तहत विकसित होने वाली कई तकनीकों का इस्तेमाल भविष्य के मानव रहित लड़ाकू विमानों, छठी पीढ़ी के फाइटर जेट कार्यक्रमों और उन्नत मिसाइल प्रणालियों में किया जा सकता है। हाल ही में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने एएमसीए परियोजना के लिए शॉर्टलिस्ट की गई तीन निजी भारतीय कंपनियों को ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ जारी किया है। इसे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ेगी और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को नई गति मिलेगी।


