रांची । पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ईंधन बाजार में हलचल पैदा कर दी है। कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण आम जनता के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे का डर साफ देखा जा रहा है। इस वैश्विक संकट के बीच झारखंड में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है। केंद्र सरकार की अपीलों और राज्य में मिलने वाली सब्सिडी ने ग्राहकों को तेजी से पेट्रोल गाडिय़ों के विकल्प के तौर पर ईवी की ओर मोड़ा है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले एक महीने में नई कारों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
राजधानी रांची में मांग का आलम यह है कि कई प्रमुख कंपनियों की गाडिय़ां शोरूम से आउट ऑफ स्टॉक हो गई हैं। स्थिति को देखते हुए अब ग्राहकों ने प्री-बुकिंग का सहारा लेना शुरू कर दिया है। रांची के सहजानंद चौक स्थित एथर शोरूम सहित ओला और टीवीएस जैसे ब्रांड्स के पास फिलहाल बिक्री के लिए एक भी मॉडल उपलब्ध नहीं है। टू-व्हीलर के साथ-साथ इलेक्ट्रिक कारों के प्रति भी लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। टाटा, महिंद्रा और एमजी जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के इलेक्ट्रिक मॉडल्स के लिए अब ग्राहकों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। कुछ चुनिंदा मॉडल्स का वेटिंग पीरियड 5 सप्ताह से लेकर 12 सप्ताह तक पहुँच गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन संकट बरकरार रहता है और सरकार सब्सिडी की नीति जारी रखती है, तो आने वाले समय में ऑटोमोबाइल सेक्टर में इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा और भी बढ़ेगा। फिलहाल, आपूर्ति की तुलना में मांग अधिक होने के कारण डीलर भी स्टॉक जुटाने की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।


