नई दिल्ली । यूक्रेन ने रुस पर कई ड्रोन हमले किए हैं। रूस ने दावा किया है कि यूक्रेन की तरफ से आने वाले 1600 ड्रोंस को उसने इंटरसेप्ट किया है। इस हमले में दो लोगों की मौत हुई है। इस जंग का दुनियाभर में असर पड़ने की बात कही जा रही है। इससे भारत भी अछूता नहीं रहने वाला है, हालात यदि नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में ईधन के दाम और बढ़ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलदोमीर जेलस्की ने ताजे हमलों की खुद जानकारी दी है। इससे युद्ध और भड़कने की आशंका जाहिर की जा रही है। दरअसल उन्होंने पोस्ट कर लिखा है, हमने रूस की ऑयल रिफाइनरी और सेना के लॉजिस्टिक ठिकाने को टारगेट किया है। यह वही अरबों डॉलर का तंत्र है जहां रूस अपने डिफेंस का सामान तैयार करता है। हमले में यूक्रेन ने एफपी1 आर एमआईसीए 2000 पालतसिया वेंडेटा ल्यूती, बार्स, फ्लेमिंगो, सिचन और पेकिन यह तमाम हथियार हैं जिसका इस्तेमाल यूक्रेन ने किया है। यह सभी कामिकाजे ड्रोंस हैं।
जेलस्की ने बताया कि यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस एसबीयू ने अनमैंड सिस्टम फोर्सेस डिफेंस इंटेलिजेंस और फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस के साथ मिलकर इस हमले को अंजाम दिया है। मॉस्को के मेयर ने बताया कि रूसी एयर डिफेंस ने अब तक 1600 से ज्यादा ड्रोंस को मार गिराया, जिनमें से 450 ड्रोनस मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। यह हमला साफ तौर पर चुनाव में बाधा डालने के इरादे से प्लान किया गया, लेकिन दुश्मन अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सका। इस ऑयल रिफाइनरी को पहले भी यूक्रेन टारगेट कर चुका है।
अमेरिका ने जो किया है उसे देखकर भारत, रूस और चीन को जल्द ही बहुत बड़ा फैसला लेना होगा। अमेरिका हमेशा से यह बोलता आया है कि भारत और चीन रूस से तेल खरीद रहे हैं। इसीलिए यूक्रेन जंग रुक नहीं रही, लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका यूक्रेन को लगातार हथियार दे रहा है। इसके अलावा सऊदी अरब और यूक्रेन के तेल को निशाना बनाकर अमेरिका ग्लोबल ऑयल सप्लाई को बाधित कर रहा है। दुनिया भर में डीजल और पेट्रोल की सप्लाई अब कम हो रही है। आने वाले दिनों में दाम बढ़ने तय हैं।
बता दें भारत और चीन को अगर सऊदी अरब और रूस दोनों से पूरी तरह कच्चा तेल मिलना बंद हो गया तो दोनों की अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा झटका लगेगा, लेकिन भारत को जो नुकसान होगा उसकी कीमत दुनिया को चुकानी पड़ेगी क्योंकि भारत के पास ही ऐसी ऑयल रिफाइनरीज हैं जो रूस के कच्चे तेल को प्रोसेस करती हैं और उसे पेट्रोल और डीजल बनाकर दुनिया भर में सप्लाई करती हैं।
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