नई दिल्ली । दुनियाभर में जनवरी 2026 में इलेक्ट्रिक कारों की रजिस्ट्रेशन सालाना आधार पर करीब 3 प्रतिशत घटकर लगभग 12 लाख यूनिट पर आ गई। इसमें बैटरी इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड दोनों तरह की गाड़ियां शामिल हैं। यह आंकड़ा कंसल्टेंसी फर्म बेंचमार्क मिनरल इंटेलिजेंस और मीडिया रिपोर्ट से सामने आया है। साल 2026 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अच्छी शुरुआत नहीं लेकर आया। बिक्री में गिरावट की सबसे बड़ी वजह चीन और नॉर्थ अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में कमजोर मांग बताई जा रही है, जहां नीतियों में बदलाव और सब्सिडी में कटौती ने सीधे खरीदारों का रुझान कम किया है। विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर मिलने वाले सरकारी इंसेंटिव कई देशों में कम या खत्म कर दिए गए हैं। चीन और यूरोपीय यूनियन ने भी पहले दिए जाने वाले कई नियम और लाभ वापस ले लिए, जिनसे ईवी बिक्री तेज़ी से बढ़ रही थी। जैसे-जैसे ये सुविधाएं कम हुईं, उपभोक्ताओं की रुचि भी घटने लगी।
वहीं हाइब्रिड कारों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है, क्योंकि ये पेट्रोल-डीजल और पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच का संतुलित और अपेक्षाकृत किफायती विकल्प देती हैं। चीन में जनवरी महीने में ईवी रजिस्ट्रेशन लगभग 20प्रतिशत गिरकर 6 लाख यूनिट से नीचे पहुंच गया, जो करीब दो साल की सबसे कम मासिक बिक्री है। सब्सिडी कटौती और नई खरीद टैक्स नीतियों ने यहां बाजार को भारी प्रभावित किया। नॉर्थ अमेरिका की स्थिति और भी खराब रही, जहां ईवी रजिस्ट्रेशन में 33 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
इसके उलट, यूरोप एकमात्र बड़ा क्षेत्र रहा जहां ईवी बिक्री में वृद्धि देखने को मिली। जनवरी में यहां इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन लगभग 24 प्रतिशत बढ़कर 3.20 लाख यूनिट से अधिक हो गई। हालांकि यह वृद्धि भी पिछले वर्ष की तुलना में सबसे धीमी रही। अन्य वैश्विक बाजारों में तस्वीर कुछ बेहतर रही। थाईलैंड में सरकारी इंसेंटिव, दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे देशों में बढ़ती मांग के चलते ईवी रजिस्ट्रेशन 92 प्रतिशत उछलकर करीब 1.90 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कमजोर मांग का असर कंपनियों पर भी दिखाई दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी बाजार पर निर्भर बड़ी ऑटो कंपनियों को पिछले वर्ष में लगभग 55 अरब डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा।
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