NDA समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामाकंन से चिंतित
रांची । झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज है। क्रॉस वोटिंग की संभावित खतरे के मद्देनजर, कांग्रेस अपने सभी 16 विधायकों को तेलंगाना भेजने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, ये विधायक 18 जून को होने वाले मतदान तक तेलंगाना के रिसॉर्ट में रुक सकते हैं, हालांकि पार्टी ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं है और विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति को संभावित क्रॉस वोटिंग के खतरे को टालने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। झारखंड की राजनीति में इस तरह की बाड़ेबंदी की सुगबुगाहट यह स्पष्ट करती है कि अपने विधायकों में संभावित फूट से चिंतित है।
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झारखंड विधानसभा में वर्तमान में इंडिया गठबंधन के पास 56 सदस्यों का स्पष्ट बहुमत है, जिसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के चार और भाकपा (माले) लिबरेशन के दो विधायक शामिल हैं। इसके विपरीत, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास केवल 24 विधायक हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 21 और लोजपा (रामविलास), आजसू व जदयू के एक-एक सदस्य हैं। इस संख्याबल के हिसाब से दोनों सीटें इंडिया गठबंधन के खाते में जानी तय दिख रही हैं। हालांकि, भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के लिए 9 भाजपा विधायकों सहित कुल 12 विधायकों के प्रस्तावक बनने की खबरों ने कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा अपनाने पर मजबूर किया है। इन आशंकाओं के बीच, रांची में इंडिया गठबंधन के शीर्ष नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक के बाद, गठबंधन ने एकजुटता का दावा कर किसी भी मतभेद से इंकार किया और दोनों प्रत्याशियों की भारी मतों से जीत सुनिश्चित करने की बात कही। गठबंधन के फैसले के अनुसार, सोमवार को दोनों प्रत्याशियों का नामांकन होना है, झामुमो की ओर से पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम और कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी प्रणव झा अपना पर्चा दाखिल कर सकते है।
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कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भी गठबंधन की एकजुटता पर जोर देकर कहा कि हमारे पास 56 विधायकों का संख्या बल है, जिससे दोनों सीटें जीतना तय है। उन्होंने दावा किया कि इस बार क्रॉस वोटिंग की संभावना 0.1 प्रतिशत भी नहीं है, क्योंकि सभी एकजुट हैं और उनका लक्ष्य सांप्रदायिक ताकतों को रोकना है। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलकर कहा कि उसके पास संख्या बल नहीं है, इसलिए उन्हें उम्मीदवार नहीं देना चाहिए। हालांकि नेताओं के बयानों में एकजुटता दिख रही है, कांग्रेस आलाकमान को नाथवानी की मजबूत पकड़ और चुनावी प्रबंधन के आगे विधायकों के मन बदलने का डर है। इसी वजह से नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही कांग्रेस नेतृत्व विधायकों को चार्टर्ड प्लेन से हैदराबाद भेजने की तैयारी में है। महागठबंधन के नेता भले ही दोनों उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हों, लेकिन चुनावी गणित और संभावित क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं ने दूसरी सीट को बेहद दिलचस्प बनाया है। सभी राजनीतिक दलों की निगाहें अब सोमवार के नामांकन और 18 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चुनावी रणनीतियाँ कितनी सफल रहीं और किस दल का गणित सबसे सटीक साबित हुआ।
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