नई दिल्ली । भारत के कोयला मंत्रालय ने खदानों के परिचालन को तेज करने के लिए सीएमडीपीए और सीबीडीपीए समझौतों में समय-सीमा और दक्षता मापदंडों में संशोधन का मसौदा तैयार किया है। प्रस्ताव का उद्देश्य खदान खोलने और उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है। मसौदे में स्ट्रक्चर्ड माइलस्टोन तय किए गए हैं- पूरी तरह खोजी गई खदान के लिए कुल परिचालन समय-सीमा: 40 महीने और आंशिक रूप से खोजी गई खदान के लिए कुल समय-सीमा 52 महीने, जिसमें भूवैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार करना अनिवार्य है। प्रमुख माइलस्टोन में देरी प्रदर्शन सुरक्षा को प्रभावित करती है। आंशिक रूप से खोजी गई खदानों में यदि जीआर तैयार करने में देरी होती है, तो प्रदर्शन सुरक्षा का 50 फीसदी तक कम्युलेटिव एप्रोप्रिएशन हो सकता है। प्रदर्शन सुरक्षा एक वित्तीय गारंटी है जो अनुबंध की शर्तों का पालन सुनिश्चित करती है। आमतौर पर यह बैंक गारंटी या फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में होती है और देरी या अनुबंध उल्लंघन की स्थिति में जब्त की जा सकती है।
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