12 साल में 10 पेपर लीक, 545 लोगों को किया गया गिरफ्तार
नई दिल्ली । बिहार केवल आईएएस-आईपीएस वाला राज्य ही नहीं है, बल्कि पेपर लीक के सरगनाओं की शरण स्थल भी बन गया है। यहां परीक्षा हॉल में पेपर बंटने से पहले जुगाड़ वाले अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंच जाता है, जिसके चलते लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक जाता है। हाल ही में बीपीएससी की परीक्षा हुई। पटना के एक सेंटर पर हंगामे के चलते पेपर को रद्द कर दिया। फिर से पेपर कब होगा, इसकी तारीख तय नहीं है, लेकिन पेपर लीक का ये मामला पहला नहीं है। बीते चार सालों में देखें तो शायद ही कोई ऐसा परीक्षा होगी, जिसमें कोई गड़बड़ी ना हुई हो।
आर्थिक अपराध इकाई के डीआईजी ने बताया कि साल 2012 से अबतक के 10 पेपर लीक मामलों की जांच की जा रही है। 545 लोगों को गिरफ्तार किया है, जांच अभी जारी है। यूपीएससी और आईआईटी की परीक्षा छोड़ दें तो राज्य में होने वाली अन्य परीक्षाएं बीपीएससी, शिक्षक बहाली या सिपाही बहाली सहित अन्य परीक्षाओं के क्वेश्चन पेपर समय से पहले ही आ जाते हैं और इसके बदले कुछ अभ्यर्थी मोटी रकम देते हैं।
बीपीएससी से पहले नीट यूजी का पेपर लीक मामला खूब गरमाया था। मामले की जांच-पड़ताल की गई तो तार बिहार से जुड़ गया। इस मामले में कई लोग गिरफ्तार भी हुए। जांच-पड़ताल के दौरान पता चला कि बिहार में पेपर लीक माफिया किस तरह से काम कर रहे हैं। परीक्षा माफियाओं का कनेक्शन झारखंड, यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में फैला हुआ है। बिहार में परीक्षा माफिया का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। इनका कारोबार कई सौ करोड़ का है।
बता दें 2024 में नीट का पेपर लीक हुआ। पेपर रद्द करने की मांग की गई लेकिन रद्द नहीं हुआ इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया था फिर जब सीबीआई ने जांच शुरू की तो 67 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं 2024 में बीपीएससी शिक्षक भर्ती का पेपर लीक हुआ था अब तक इस मामले में 285 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 25 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। 2024 में ही बिहार राज्य स्वास्थ्य सोसायटी, सीएचओ स्वास्थ्य विभाग सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी की ऑनलाइन परीक्षा का भी पेपर लीक हुआ। कुल 36 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।


