रांची । झारखंड सरकार ने राज्य में चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से रिम्स, रांची में स्नातक (यूजी), स्नातकोत्तर (पीजी) तथा सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटों में व्यापक वृद्धि का प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बुधवार को रिम्स निदेशक को पत्र भेजकर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है।
पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार की ओर से संचालित एक केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में यूजी, पीजी एवं सुपर स्पेशियलिटी सीटों की वृद्धि के लिए प्रति अतिरिक्त सीट लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना में कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार तथा 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाएगा।
विभाग ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत पहले ही महात्मा गांधी मेमोरियल चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, जमशेदपुर में यूजी सीटों को 150 से बढ़ाकर 250 तथा पीजी सीटों को 49 से बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसी प्रकार शहीद निर्मल महतो चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, धनबाद में यूजी सीटों को 100 से बढ़ाकर 250 तथा पीजी सीटों को 19 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को भी भारत सरकार की ओर से मंजूरी दी जा चुकी है।
इसी क्रम में अब रिम्स, रांची के लिए भी महत्वाकांक्षी विस्तार योजना तैयार की जा रही है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यूजी सीटों की संख्या 180 से बढ़ाकर 250, पीजी सीटों की संख्या 176 से बढ़ाकर 275 तथा सुपर स्पेशियलिटी सीटों की संख्या 11 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए रिम्स प्रशासन को आवश्यक अधोसंरचना, भवन, उपकरण एवं अन्य संसाधनों का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासी परिषद की स्वीकृति के बाद राज्य सरकार को भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रस्ताव को भारत सरकार को अग्रसारित किया जा सके। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सीटों की वृद्धि के लिए पुराने भवनों के जीर्णाेद्धार, जर्जर एवं अनुपयोगी भवनों को ध्वस्त कर नए भवनों का निर्माण तथा आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त अधोसंरचना विकसित करने के प्रस्ताव भी शामिल किए जा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के अंतर्गत छात्रावास निर्माण को लेकर भी नई रणनीति अपनाने की तैयारी है। राज्य सरकार ने सिद्धांततः निर्णय लिया है कि छात्रावासों का निर्माण प्रत्यक्ष सरकारी व्यय के बजाय पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर कराया जाए। इसके लिए भारत सरकार के वायबिलिटी गैप फंड (वीजीएफ) से अनुदान प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। इससे राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा तथा छात्रावासों के संचालन, रखरखाव और आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की जा सकेगी। पत्र में रिम्स परिसर में पहले से निर्मित छात्रावासों के उन्नयन, रखरखाव तथा भविष्य की आवश्यकताओं का आकलन कर नए छात्रावासों के निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने को भी कहा गया है। इस प्रस्ताव को शासी परिषद के एजेंडे में शामिल कर अनुमोदन प्राप्त करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस पहल के सफल क्रियान्वयन से रिम्स न केवल पूर्वी भारत के प्रमुख चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, बल्कि झारखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने तथा राज्य के विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


