नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों के लिए फंसे कर्ज के बदले जब्त की गई अचल संपत्तियों (एसएलएफए) के निपटान हेतु संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत बैंकों को ऐसी संपत्तियों को अधिकतम 7 साल के भीतर सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से बेचना अनिवार्य होगा। आरबीआई ने कहा कि बैंक को चिह्नित गैर वित्तीय संपत्ति (एसएनएफए) को अपनी नीति के तहत निर्धारित अधिकतम 7 साल की अवधि के भीतर निपटाना होगा।
इसके लिए सरफेसी अधिनियम, 2002 में निहित नीलामी के सिद्धांतों का पालन करते हुए सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से जल्द से जल्द निपटान के सभी प्रयास करने होंगे। यह नया निर्देश एसएनएफए को नियंत्रित करने वाले एक नए विवेकपूर्ण ढांचे का हिस्सा है और 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा। आरबीआई का मानना है कि बैंक आमतौर पर अचल संपत्तियों का व्यापार नहीं करते, बल्कि इन्हें कर्ज न चुकाने वालों से अधिग्रहित करते हैं।


