नई दिल्ली । भारत में जिस मोरिंगा (सहजन) को ‘ट्री ऑफ लाइफ’ और ‘मिरेकल ट्री’ जैसे नामों से जाना जाता है, उसी मोरिंगा के पत्तों, पाउडर, तेल और कैप्सूल जैसे उत्पादों की बिक्री पर ऑस्ट्रेलिया ने रोक लगा दी है। ऑस्ट्रेलिया की खाद्य मानक संस्था ने इसे ‘नॉवेल फूड’ श्रेणी में रखते हुए कहा है कि इसके खाद्य उपयोग को लेकर पर्याप्त सुरक्षा संबंधी वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बिना मंजूरी इसके उत्पाद बेचने पर भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भारत में मोरिंगा का उपयोग सदियों से भोजन और आयुर्वेदिक चिकित्सा दोनों में किया जाता रहा है। इसके पत्ते, फलियां, फूल और बीज पोषक तत्वों से भरपूर माने जाते हैं। दक्षिण भारत के कई राज्यों, विशेषकर केरल और तमिलनाडु में सहजन की सब्जी और अन्य व्यंजन दैनिक भोजन का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहले अपने भोजन में मोरिंगा के पराठे और चाय को शामिल करने की बात कर चुके हैं, जिसके बाद यह पौधा स्वास्थ्यवर्धक आहार के रूप में और अधिक चर्चा में आया। विशेषज्ञों के अनुसार मोरिंगा में विटामिन, खनिज, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
आयुर्वेद में इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, सूजन कम करने, रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने और पोषण की कमी दूर करने में उपयोगी माना जाता है। वर्तमान में दुनिया के कई देशों में मोरिंगा पाउडर और अन्य उत्पाद हेल्थ सप्लीमेंट के रूप में भी लोकप्रिय हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि मोरिंगा को खाद्य पदार्थ के रूप में व्यापक स्वीकृति देने से पहले इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर और वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक हैं। इसी आधार पर ऑस्ट्रेलिया के साथ न्यूजीलैंड और कुछ अन्य देशों में भी इसे ‘नॉवेल फूड’ की श्रेणी में रखा गया है। इसके चलते वहां बिना नियामकीय मंजूरी मोरिंगा उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई है। यहां तक कि सीमा पर ऐसे उत्पाद लाने पर भी उन्हें जब्त किया जा सकता है।
इस फैसले से मोरिंगा की खेती करने वाले किसानों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों में नाराजगी है। उनका कहना है कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित करने के बजाय उन पर व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन किए जाने चाहिए। उनका तर्क है कि भारत, अफ्रीका, फिलीपींस और लैटिन अमेरिका सहित अनेक देशों में लोग सदियों से मोरिंगा का सेवन करते आ रहे हैं और इसे सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन माना जाता है। दूसरी ओर भारत में सरकार किसानों को मोरिंगा की खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है और कई स्टार्टअप इसके आधार पर चाय, पाउडर, बिस्किट तथा अन्य स्वास्थ्य उत्पाद तैयार कर रहे हैं।


