◆ तीन-तीन नामों का पैनल उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को भेजा गया है,अब तक नियुक्ति लंबित
◆डॉ. राजीव रंजन शर्मा के रजिस्ट्रार पद से इस्तीफा के बाद से अतिरिक्त प्रभार में हैं सीसीडीसी डॉ.अब्दुस सत्तार
◆कार्यकाल पूरा होने के बाद भी पद पर बने हैं एफओ डॉ.संजय कुमार सिन्हा और परीक्षा नियंत्रक डॉ. रीना नीलिमा लकड़ा
विशेष संवाददाता
दुमका। सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय (एसकेएमयू) में रजिस्ट्रार, वित्त पदाधिकारी (एफओ) और परीक्षा नियंत्रक जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियमित नियुक्ति का मामला लंबित है। रजिस्ट्रार का पद जुलाई से प्रभार में चल रहा है, जबकि वित्त पदाधिकारी और परीक्षा नियंत्रक का कार्यकाल 6 सितंबर को समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद दोनों अधिकारी अपने-अपने पदों का कार्यभार संभाल रहे हैं।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, इन महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय स्तर से तीन-तीन नामों का पैनल उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को भेजा गया है। अब नियुक्ति को लेकर सरकार के स्तर पर निर्णय लंबित है। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान व्यवस्था के तहत ही कामकाज संचालित किया जा रहा है।
जेपीएससी के माध्यम से नियुक्त विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. राजीव रंजन शर्मा ने 7 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद से रजिस्ट्रार का पद रिक्त है। कुलपति के आदेश से सीसीडीसी डॉ. अब्दुस सत्तार रजिस्ट्रार के अतिरिक्त प्रभार में काम कर रहे हैं।
वित्त पदाधिकारी (एफओ) डॉ. संजय कुमार सिन्हा का कार्यकाल 6 सितंबर को पूरा हो गया। इससे पहले मार्च में उन्हें छह माह का सेवा विस्तार दिया गया था। सितंबर में यह अवधि भी समाप्त हो गई, लेकिन अब तक एफओ के पद पर नई नियुक्ति नहीं हुई है। डॉ. सिन्हा ही फिलहाल वित्त पदाधिकारी का काम देख रहे हैं।
विश्वविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डॉ. रीना नीलिमा लकड़ा का कार्यकाल भी 6 सितंबर को समाप्त हो गया। इस पद पर भी अब तक नई नियुक्ति नहीं हुई है और डॉ. लकड़ा ही परीक्षा नियंत्रक का कार्य संभाल रही हैं।
परीक्षा नियंत्रक के पद पर डॉ. लकड़ा के बने रहने को लेकर कई छात्र संगठनों की ओर से विरोध भी किया गया है। छात्र संगठनों ने उन्हें पद से हटाने की मांग को लेकर आंदोलन किया था। इसके बावजूद नई नियुक्ति होने तक वही परीक्षा नियंत्रक का कार्य देख रही हैं।
विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार, वित्त पदाधिकारी और परीक्षा नियंत्रक जैसे पद प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इन पदों पर नियमित नियुक्ति नहीं होने से विश्वविद्यालय में स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब नजरें सरकार के स्तर पर होने वाले निर्णय पर टिकी है।


