बागी’ बिगाड़ेंगे सियासी गेम, महाराष्ट्र में टिकटों का टकराव, चुनाव बाद अजित पवार-उद्धव ठाकरे बदल सकते हैं पाला
मुंबई/रांची । महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा के लिए नामांकन की प्रक्रिया खत्म हो गई है। अब चुनाव प्रचार जोर पकड़ेगा। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने स्टार प्रचारकों की घोषणा कर दी है। हालांकि पार्टियों को नाम वापसी का इंतजार है, क्योंकि अधिकांश सीटों पर बागी उम्मीदवारों ने भी नामांकन किया है। ऐसे में पार्टियों खासकर भाजपा और कांग्रेस की कोशिश है कि रूठों को मनाकर अपनी स्थिति मजबूत की जाए। अगर समय रहते पार्टियों ने समीकरणों को नहीं साधा तो बागी बिगाड़ेंगे सियासी गेम। महाराष्ट्र और झारखंड के विधानसभा चुनाव को लेकर जहां सभी पार्टियां तैयार नजर आ रही हैं, तो वहीं इस बार सभी पार्टियों को अपने नेताओं की बगावत का भी सामना करना पड़ रहा है।
एनडीए और इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के कुछ नेताओं को टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर गए हैं। महाराष्ट्र में इस बार सभी दलों को अपने नेताओं की बगावत का सामना करना पड़ रहा है। एनडीए और इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के कुछ नेताओं को टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर गए हैं। इसके चलते स्थिति यह हो गई है कि बीजेपी के खिलाफ शिंदे की शिवसेना का बागी मैदान में है तो एनसीपी के खिलाफ बीजेपी का बागी मैदान में उतर गया है। निर्दलीय उतरे बागी उम्मीदवार 4 नवंबर तक अपना नाम वापस नहीं लेते हैं और चुनाव में आखिरी तक जमे रहते हैं तो फिर आधिकारिक उम्मीदवारों के लिए ही नहीं बल्कि गठबंधन के लिए भी सिर दर्द बन जाएगी। महाराष्ट्र में 6 बड़े दल मैदान में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की समयसीमा खत्म होने के साथ ही चुनावी तस्वीर साफ हो गई। शिवसेना और एनसीपी में बगावत के चलते इस बार 6 बड़े दल मैदान में हैं। यही कारण है कि बागी भी ज्यादा हैं। प्रदेश की लगभग हर सीट पर बागी हैं। अब सबकी निगाह नाम वापसी की अंतिम तारीख (4 नवंबर) पर है। उसके बाद पता चलेगा कि लड़ाई कैसी होगी। इस बार 7,995 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। आखिरी दिन 4,996 ने पर्चे भरे। महायुति और एमवीए ने नामांकन खत्म होने के बाद भी सीट बंटवारे का फॉर्मूला नहीं बताया। प्रत्याशी देखें तो महायुति में 148 उम्मीदवारों के साथ भाजपा और एमवीए में 103 के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। दोनों पार्टियां 2019 के विधानसभा चुनाव से कम सीटों पर लड़ रही हैं। भाजपा ने पिछली बार 164 तो कांग्रेस ने 147 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। वहीं, शिवसेना-शिंदे ने 80, एनसीपी अजित ने 53, शिवसेना- उद्धव ने 89, एनसीपी- शरद ने 87 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं।
पिछले चुनाव में शिवसेना (अविभाजित) और एनसीपी (अविभाजित) 124-124 सीटों पर लड़ी थीं। इन सबके अलावा इस बार महायुति ने 5 सीटें सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ी हैं। दूसरी तरफ एमवीए के छोटे सहयोगी दल 6 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। महायुति की 2 और एमवीए की 3 सीटों पर अभी भी स्थिति साफ नहीं है। अंतिम समय तक नहीं सुलझा सीटों का मामला दो चरणों में होने वाले झारखंड विधानसभा चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया खत्म हो गई है। भाजपानीत एनडीए ने पहले ही सीटों के मामले को सुलझा लिया, वहीं, झामुमो लीड इंडिया ब्लॉक में अंतिम समय तक सीटों का मामला नहीं सुलझा है। तीन सीटों विश्रामपुर, छतरपुर और धनवार में उसके घटक दल आपस में फाइट करते दिख रहे हैं। सीटों की बात करें तो एनडीए में भाजपा 68, सुदेश महतो की आजसू 10, नीतीश कुमार की जदयू दो और चिराग पासवान की एलजेपीआर एक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, इंडिया ब्लॉक में झामुमो 43, कांग्रेस 30, लालू यादव की राजद ने 6 सीटों पर उम्मीदवार उतारा है। तीन सीटों बगोदर, सिंदरी और निरसा में भाकपा माले के कैंडिडेट को सपोर्ट किया है। जबकि, भाकपा माले ने धनवार सीट से अपने प्रत्याशी को वापस नहीं लेने का ऐलान किया है। चुनाव बाद नए गठबंधन के आसार जिस तरह की तस्वीर महाराष्ट्र में बन रही है उससे यही लगता है कि किसी भी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने वाला है।
जाहिर है ऐसी हालत में एक बार फिर हॉर्स ट्रेडिंग शुरू होगी। कई पार्टियां टूटेंगी और बिखरेंगी। भाजपा में जिस तरह अजित पवार को लेकर माहौल बन रहा है पार्टी चाहेगी उनसे किनारा किया जाए। इसी तरह कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में भी आपस में विश्वसनीयता का बेहद अभाव है। कांग्रेस की स्थानीय इकाई बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि शिवसेना के साथ चला जाए। जिस तरह 2004 में केंद्र में यूपीए में कई ऐसे दल भी शामिल हुए थे जो पहले यूपीए में नहीं थे। उसी तरह की संभावना महाराष्ट्र के लिए की जा सकती है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन समाप्त होने के साथ एक बात स्पष्ट हो गई कि महाराष्ट्र में बने दोनों गठबंधन अव्यवहारिक हैं। महा विकास आघाड़ी और महायुति दोनों ही भिन्न भिन्न विचार वाले ऐसे दलों का समूह हैं जो सत्ता के लालच में इक_ा हुए हैं। यही कारण है कि महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी को कम से कम सात विधानसभा क्षेत्रों में 2 -2 पार्टियों के प्रत्याशी हैं। यही हाल महायुति के साथ भी हुआ है। इस गठबंधन में बीजेपी जैसी काडर वाली पार्टी भी कड़े फैसले नहीं ले सकी। कम से कम पांच सीटों पर यहां भी एमवीए जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। दोनों गठबंधनों ने दावा किया कि आने वाले दिनों में इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 4 नवंबर है। पर जिस तरह दोनों ही गठबंधनों में अंदरूनी राजनीति हो रही है पक्का है कि चुनाव जीतने के बाद नए गठबंधन अस्तित्व में आएंगे।


