मखाना से लेकर काले चावल तक कई देशों में हो रहे निर्यात
नई दिल्ली । भारत के पारंपरिक कृषि और खाद्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग तेजी से बढ़ रही है। बिहार के मखाने से लेकर मणिपुर के विशेष काले चावल तक, देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े ये पारंपरिक सुपरफूड्स अब विदेशों के प्रीमियम स्टोर्स और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी खास जगह बना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 139वें एपिसोड में यह जानकारी साझा की गई कि बिहार के पूर्णिया जिले में उत्पादित मखाना अब यूरोपीय देश ग्रीस तक निर्यात किया जा रहा है। इस उदाहरण ने भारतीय पारंपरिक खाद्य पदार्थों की वैश्विक मांग को रेखांकित किया है। आज भारत के ये पौष्टिक उत्पाद उत्तरी अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर निर्यात किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मखाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वस्थ स्नैक के रूप में बेहद लोकप्रिय हो चुका है। केंद्र सरकार द्वारा नेशनल मखाना बोर्ड का गठन करने और इसके निर्यात के लिए विशेष व्यापारिक कोड निर्धारित करने से इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बहुत गति मिली है। भारत से निर्यात होने वाले कुल मखाने का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात में जाता है। इसके अतिरिक्त जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल और अब ग्रीस जैसे देशों में भी भारतीय मखाने की भारी मांग बनी हुई है। इसी प्रकार, भारत में श्री अन्न के रूप में बढ़ावा दिए जा रहे पारंपरिक मोटे अनाजों जैसे रागी, बाजरा और ज्वार की मांग दुनिया भर में बढ़ रही है। अपने उच्च पोषण और ग्लूटेन-मुक्त गुणों के कारण ये उत्पाद दुनिया भर के 139 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। इनके प्रमुख खरीदार देशों में अमेरिका, ब्रिटेन, सऊदी अरब, यूएई और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इसके अलावा, भारत में सहजन के नाम से जाना जाने वाला मोरिंगा पाउडर भी विदेशों में बेहद लोकप्रिय हो रहा है। इसके पत्तों से बने पाउडर का इस्तेमाल स्मूदी और सप्लीमेंट्स में किया जाता है, जिसका सबसे बड़ा खरीदार अमेरिका है। भारतीय हल्दी और मसालों की मांग भी दुनिया भर में लगातार बनी हुई है। भारतीय हल्दी में पाए जाने वाले औषधीय तत्त्वों के कारण अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, यूएई और यूरोपीय संघ में इसकी भारी खपत है। वहीं, भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) प्राप्त मणिपुर का काला चावल अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण यूरोप, अमेरिका, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के लग्जरी स्टोर्स में एक प्रीमियम अनाज के रूप में बेचा जा रहा है।


