◆वार्ड पार्षद महेशराम चंद्रवंशी ने नप अध्यक्ष अभिषेक चौरसिया पर लगाया सीधा आरोप
◆अध्यक्ष अभिषेक चौरसिया बोले- इंजीनियर और कार्यपालक पदाधिकारी करते हैं नक्शा पास
विशेष संवाददाता
दुमका। दुमका नगर परिषद में भवन का नक्शा पास कराने के नाम पर कथित रूप से अवैध उगाही का मामला सामने आने के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में नगर परिषद के वार्ड पार्षद महेश राम चंद्रवंशी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वे नगर परिषद अध्यक्ष पर नक्शा पास कराने के नाम पर पैसे मांगे जाने का सीधा आरोप लगाते नजर आ रहे हैं।
वार्ड पार्षद का कहना है कि नक्शा पास कराने के नाम पर पैसे मांगने की शिकायतों से नगर परिषद की छवि खराब हो रही थी। इसी कारण नगर परिषद परिसर में एक बोर्ड लगाना पड़ा, जिस पर स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि नक्शा पास कराने के एवज में यदि कोई पैसे की मांग करता है तो उसे पैसे नहीं दें।
इधर, यह मामला तब और गरमा गया जब नगर परिषद अध्यक्ष अभिषेक चौरसिया ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका पर ही सवाल उठा दिए। अध्यक्ष ने कहा कि भवन का नक्शा पास करने की प्रक्रिया में वार्ड पार्षद, उपाध्यक्ष या अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं होती है। नक्शा पास करने का काम इंजीनियर और नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी करते हैं।
अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भवन का नक्शा तैयार करने के लिए नगर परिषद में 10 आर्किटेक्ट का पैनल है, लेकिन कथित तौर पर इनमें से एक खास आर्किटेक्ट द्वारा तैयार किए गए नक्शे को ही स्वीकृति दी जाती है। उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अपनी इच्छा के अनुसार किसी का नक्शा पास करते हैं और किसी का नहीं करते हैं।पत्रकारों से बातचीत के दौरान अध्यक्ष अभिषेक चौरसिया ने नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में विफल रहने की बात भी स्वीकार की।
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नगर परिषद को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का वादा कर अध्यक्ष बने थे अभिषेक चौरसिया
दुमका। नगर निकाय चुनाव के दौरान अभिषेक चौरसिया ने शहर की जनता से नगर परिषद को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने का वादा किया था। इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए वे अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए थे।अब वार्ड पार्षद महेशराम चंद्रवंशी के वायरल वीडियो और अध्यक्ष के बयानों के बाद नगर परिषद में भवन नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।


