◆जुर्माना देकर गिट्टी-बालू की वैधता हासिल करने का रास्ता बंद
◆बिल भुगतान से पहले लघु खनिजों के ई-चालान की जांच अनिवार्य
डॉ. सुमन सिंह
दुमका । सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों को लेकर नियमों में बदलाव के बाद कार्य विभागों में संवेदकों के बिल भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। 27 अप्रैल 2026 से लागू नए प्रावधान के तहत पत्थर, गिट्टी, बालू, स्टोन चिप्स, मिट्टी और मोरम की आपूर्ति व परिवहन के लिए वैध ई-परिवहन चालान अनिवार्य कर दिया गया है। पुराने नियम-55 के तहत बिना वैध चालान के इस्तेमाल किए गए खनिज के मूल्य के बराबर राशि दंड के रूप में जमा कर मामले को नियमित कराने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इससे विभिन्न कार्य विभागों में संवेदकों के बिल भुगतान में पेंच फंस रहा है।इस नई व्यवस्था से कार्य विभागों के ठेकेदार सांसत में हैं।खनन विभाग ने अप्रैल में सभी कार्य विभागों को पत्र भेजकर नए प्रावधान की जानकारी दी थी। इसमें खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा-15 के तहत झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली, 2004 में किए गए संशोधन और 27 अप्रैल को प्रकाशित गजट का हवाला दिया गया है।
विभाग के अनुसार, गजट प्रकाशन के बाद नियम-55 के तहत स्वामित्व राशि के बराबर दंड जमा कर बिना वैध चालान वाले खनिज को नियमित करने का प्रावधान विलोपित हो गया। अब बिना वैध ई-परिवहन चालान लघु खनिज की आपूर्ति या परिवहन को अवैध उत्खनन, भंडारण अथवा परिवहन माना जाएगा। ऐसे मामलों में पुराने नियम का सहारा नहीं लिया जा सकेगा।
खनन विभाग ने ‘द झारखंड मिनिरल्स (प्रिवेंशन ऑफ इलीगल माइनिंग, ट्रांसपोर्टेशन एंड स्टोरेज) एमेंडमेंट रूल्स, 2026’ के नियम-7, 9(1) एवं 13(1) का हवाला देते हुए कहा है कि वैध परिवहन चालान के बिना खनिज का परिवहन नहीं किया जा सकता।इसके लिए जिम्स पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर परिवहन चालान लेना होगा।
दुमका जिले में पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य, भवन प्रमंडल, पेयजल एवं स्वच्छता, जिला परिषद, नगर परिषद, शिक्षा और विद्युत समेत कई विभागों की योजनाओं में लघु खनिजों का इस्तेमाल होता है। नए प्रावधान के बाद इन योजनाओं के बिल भुगतान में खनिज की वैध आपूर्ति और ई-चालान की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
खनन विभाग ने स्पष्ट किया है कि गजट प्रकाशन की तिथि से सरकारी कार्यों में लघु खनिज का उपयोग संबंधित विभाग, संवेदक, फर्म या कंपनी द्वारा वैध ई-परिवहन चालान के माध्यम से ही किया जाना है। पहले प्रचलित बुक ट्रांसफर अथवा चेक/ड्राफ्ट के माध्यम से खनिज हस्तांतरण की व्यवस्था भी अब प्रभावी नहीं है।कार्य विभागों को संवेदक या एजेंसी से ई-परिवहन चालान लेने के साथ खनिज के स्वामित्व, डीएमएफ, मैनेजमेंट शुल्क और पर्यावरणीय शुल्क आदि की निर्धारित राशि जमा होने की जांच करने का निर्देश दिया गया है।


