भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ,सांसद व यूपी के सह प्रभारी डॉ प्रदीप वर्मा से संताल एक्सप्रेस के प्रधान संपादक अशोक कुमार की खास व लंबी बातचीत
राजनीति कोई पार्ट टाइम जॉब नहीं है।
संघ के पदाधिकारियों को आप तभी प्रभावित कर पायेंगे जब आप संघ की दैनिक शाखाओं में जाएंगे।
भले आप मंत्री, विधायक व सांसद बन जाएं लेकिन यदि आपके गृह राज्य में आपकी सरकार नहीं है तो आपकी कोई पूछ नहीं है।
हमारा लक्ष्य और प्राथमिकता झारखंड में संगठन को मजबूत कर यहां भाजपा की सरकार बनानी है ।
भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली रघुवर दास की सरकार में अरविंद मिल और ओरिएंट क्राफ्ट जैसे उद्योग रांची में लगे ,वे हेमंत सरकार के सात वर्षों की सरकार में बंदी के कगार पर हैं।
सीएनटी और एसपीटी एक्ट होते हुुए भी झारखंड में आदिवासियों की जमीन सुरक्षित नहीं रह सकी।
रघुवर सरकार की बनाई नीतियों के कारण ही आज झारखंड में 15 निजी विवि खुले हेैं जिसमें यहां के हजारों लोगों को रोजगार मिला है।
————————————————–
प्रश्र: आप संघ के कार्यकर्ता थे।आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति की नहीं थी। फिर भी आपका भाजपा की राजनीति में कब अैार कैसे आना हुआ।
उत्तर: उन दिनों में सामाजिक कार्यों में लगा था। सरला बिरला के इस कैंपस में पहले महादेवी वर्मा टीबी सेनिटोरियम चलता था। मैं उसका संचालक था। उस समय झारखंड अलग राज्य का आंदोलन तेजी से चल रहा था। हमलोग भी अलग राज्य के लिए आंदोलन चला रहे थे। उस समय धर्मांतरण एक बड़ा मुद्दा था। सैकड़ों घरों में धर्मवापसी का काम मैंने कराया। यह सच है कि हमारी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति की नहीं थी लेकिन कोलकाता में मेरे पिताजी एक फैक्टरी में काम करते थे और बीएमएस के सक्रिय नेता थे। घर में नेताअेां का आनाजाना होता रहता था। इससे मुझे भी प्रेरणा मिली। 2009 में मुझे भाजपा में शामिल होकर काम करने का मौका मिला। भाजपा के कार्यक्रमों व बड़े नेताओं की रैलियों में भोजन का काम मेरे जिम्मा होता था। 2015 पार्टी में डिजिटल सदस्यता शुरू हुई तो मुझे झारखंड का सदस्यता प्रभारी बनाया गया।42लाख सदस्य बने। इस तरह भाजपा में मैं सक्रिय होता चला गया। जो भी जिम्मेवारी मुझे मिली उसका निष्ठा से पूरा किया। मेरा मानना है कि राजनीति कोई पार्ट टाइम जॉब नहीं है। इसमें दिन रात काम करना होता है तभी आपकी पहचान बनती है।
————————————————–
प्रश्र : भाजपा में कई पुराने एवं समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्हें इतनी जल्दी सफलता नहीं मिलती है जितनी जल्दी आपको मिली। आप सीधे प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य पार्टी पदाधिकारी बनकर राज्यसभा तक पहुंच गए जब कि आपसे सीनियर कई नेता अभी लाइन में लगे हैं। इस बात की चर्चा तेज है कि भाजपा में गणेश परिक्रमा करनेवाले को सफलता जल्द मिल जाती है। इसमें कितनी सच्चाई है?
उत्तर : मैं आपके इस सवाल से सहमत नहीं हूं कि पार्टी में गणेश परिक्रमा करनेवाले नेता को सफलता मिलती है। हमारी पार्टी में समर्पित भाव से काम करनेवाले को उसकी क्षमता के अनुसार पद और दायित्व दिया जाता है। पार्टी से हजारों और लाखों कार्यकर्ता जुड़े हैं। यह विश्व की सबसे अधिक कार्यकर्ताओं वाली पार्टी है। मैंने कभी किसी नेता की गणेश परिक्रमा नहीं की। दिल्लाी पार्टी मुख्यालय भी मैं कभी कभार ही जाता रहा हूं।
————————————————–
प्रश्र: आरोप हे कि आप संघ के पदाधिकारियों को येन केन प्रकारेण प्रभावित कर पार्टी में आगे बढ़ते चले गए ओैर आज इस मुकाम तक पहुंचने में सफल रहे हैं?
उत्तर: यह आरोप गलत है। आप संघ के पदाधिकारियों को तभी प्रभावित कर सकते हैं जब आप संघ की शाखाओं में नियमित रूप से जा रहे हों। संघ के पदाधिकारियों को प्रभावित करने का और दूसरा कोई उपाय नहीं है।
————————————————–
प्रश्र : आप लंबे समय तक प्रदेश भाजपा में संगठन में पदाधिकारी रहे हैं। इसकी क्या वजह रही कि पार्टी 2019 और 2024 में विधानसभा चुनाव में सीटें हारती चली गयी खासकर आदिवासी सीटें?
उत्तर : चुनाव की जीत हार के कई कारण होते हैं। चुनाव में जीत हार से आप किसी पार्टी के कमजोर व मजबूत होने का आकलन नहीं कर सकते हैं। झामुमो का खासकर संताल परगना में वैसा संगठनात्मक ढांचा नहीं है जेैसा की भाजपा का है फिर भी वे चुनाव जीतते हैं । इसका कारण यह है कि चुनाव के ठीक पहले वे अफवाह फैलाकर ग्रामीण मतदाताओं को खासकर आदिवासियों को प्रभावित करने में सफल हो जाते हैं उदाहरण के तौर पर जब हमारी रघुवर दास की बहुमत की सरकार ने स्थानी नीति बनायी तो झामुूमो ने यह अफवाह फेेैलायी कि जब राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी तो आदिवासियों की जमीन छीन ली जाएगी। इससे आदिवासी उनके झांसे में आ गए और भाजपा को नुकसान हुआ।
————————————————–
प्रश्र : क्या कारण है कि झारखंड में आदिवासी भाजपा से दूर हो गए हैं जिसके कारण विगत दोनों चुनाव में भाजपा की आदिवासी सीटें घटती चली गयी है। इसके लिए नेतृत्व जिम्मेवार है या और कोई कारण है?
उत्तर : आपका यह सवाल सही नहीं है कि झारखंड में भाजपा से आदिवासी दूर हो गए हैं। मैं फिर यही कहूंगा कि चुनाव की जीत हार से किसी पार्टी की संगठनात्मक क्षमता का आकलन नही ंकिया जा सकता है। सीटें घटने के लिए नेतृत्व को भी जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता है। आदिवासी समाज के पढ़े लिखे लोग आज भी भाजपा की रघुवर सरकार द्वारा आदिवासियों के लिए किए गए कार्योंं को याद करते हैं। चुनाव के समय झामुमो के एजेंट किस तरह गांवों में जाकर मतदाताओं को नोटों की थैली व प्रलोभन देकर प्रभावित करते हैं यह किसी से छिपी हुई बात नहीं है। भाजपा ऐसा नहीं करती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शायद ही कभी अपने क्षेत्र में जाते हैं। क्या आपने कभी देखा है हेमंत सोरेन को अपने क्षेत्र में जाते हुए?
————————————————–
प्रश्र : हमने हेमंत सोरेन को कई बार अपने क्षेत्र में जाते हुए और आम लोगों की समस्याएं सुनते हुए मैंने देखा है।
उत्तर : कभी कभार ही ऐसा होता होगा। हेमंत सोरेन के प्रतिनिधि पंकज मिश्रा पूरे संताल परगना में एक गिरोह चलाते हैं। साहिबगंज और पाकुड़ का अच्छी क्वालिटी का पत्थर , बालू और कोयला की अवैध तस्करी हो रही है।
————————————————–
प्रश्र: संताल परगना में विधानसभा की 18 और लोकसभा की तीन सीटें हैं। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में आपकी पार्टी ने मात्र एक एक सीट ही जीत पायी। जबकि उसके पूर्व हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने दो सीटें और विधानसभा में आठ सीटें जीती थी । उन दिनों आप संताल परगना के प्रभारी हुआ करते थे। आपके प्रभारी से हटते ही वहां सीटे कैसे घट गयी?
उत्तर : इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि पहले कांग्रेस, जेएमएम और राजद अलग अलग चुनाव लड़ती थी लेकिन पिछले चुनाव में इन दलों ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा जिसका फायदा उसे हुआ। हमारी पार्टी में इस तरह का मजबूत गठबंधन नहीं बन सका।
————————————————–
प्रश्र: आपकी पार्टी ने भी एनडीए गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। जदयू और आजसू आपके साथ थे।
उत्तर : संताल परगना में हमारा गठबंधन मजबूत साबित नहीं हो सका।
————————————————–
प्रश्न : रांची के सीटिंग कैंडिडेट संजय सेठ का आप टिकट कटवा कर स्वयं टिकट लेना चाह रहे थे लेकिन संजय सेठ ने पुन: टिकट पाकर आपको पटकनी दे डाली।
उत्तर : राजनीति में सक्रिय हर व्यक्ति की चुनाव लडऩे की इच्छा होती है। मैं इसका अपवाद नहीं हूं। पार्टी की मर्यादा में रहकर मैं टिकट चाह रहा था। मैंने पार्टी की मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया ।
————————————————–
प्रश्र : पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगले मंत्रिमडल विस्तार में आपकों केंन्द्र में मंत्री बनाया जा सकता है।
उत्तर : मंत्री बनने की मेरी कोई इच्छा नहीं है। मैंने केन्द्रीय नेतृत्व को अपनी इच्छा से अवगत करा दिया है। मैं शुरू से संगठन का आदमी रहा हूं। संगठन के कामों में मेरी रूचि है। अगे भी मैं संगठन में ही रहना चाहता हूं।
————————————————–
प्रश्र: भाजपा की पूर्ण बहुमत की रघुवर दास की सरकार पांच साल रही लेकिन राज्य का औद्योगिक विकास नहीं हो सका।
उत्तर : उनकी सरकार के प्रयास से यहां अरविंद मिल ओैर ओरिएंट क्राफ्ट जैसे उद्योग रांची में लगे। हजारों लोगों को रोजगार मिला। पहले तीन निजी विश्वविद्यालय थे आज रघुवर सरकार द्वारा बनायी गयी नीतियों के कारण 15 निजी विवि खोले गए और हजारों लोगों को रोजगार मिला लेकिन हेमंत सरकार के सात साल के शासन में दोनेां उद्योग लगभग बंद हो चुके हैं।
————————————————–
प्रश्र : भाजपा में केन्द्रीय दायित्व मिलने के बाद क्या आप झारखंड में संगठन की बेहतरी के लिए काम करते रहेंगे या फिर पूरा देश आपका कर्म क्षेत्र रहेगा?
उत्तर : मैं अपने गृह राज्य झारखंड में काम करना चाहूंगा ताकि यहां अगले चुनाव में भाजपा की सरकार बन सके।
————————————————–
प्रश्र: झारखंड में कुर्मी जाति के वोटर अधिकर भाजपा के समर्थक माने जाते हैं लेकिन भाजपा में एक भी ऐसा कु र्मी चेहरा नही है जो भाजपा को पूरे प्रदेश में नेतृत्व दे सके?
उत्तर : देखिए, मैं शुरू से जातिवाद की राजनीति का विरोधी रहा हूं। मेरा ऐसा मानना हेै कि जाति व वर्ग विशेष के बल पर कोई भी राजनीतिक दल अपना व्यापक जनाधार नहीं बना सकती है। भाजपा जातिवाद की राजनीति में विश्वास नहंीं करती है।


