● रोजगार की जंग: आउटसोर्सिंग और दैनिक वेतन बहाली में 100% स्थानीय भागीदारी की मांग।
● भू-दाताओं की अनदेखी: जमीन देने वाले परिवारों को दरकिनार करने पर भड़का झारखंड छात्र समन्वय समिति का गुस्सा।
● अल्टीमेटम: अस्पताल अधीक्षक को सौंपा कड़ा ज्ञापन, मांगे पूरी न होने पर उग्र आंदोलन का ऐलान।
ब्यूरो
दुमका। झारखंड की उपराजधानी दुमका स्थित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तृतीय और चतुर्थ वर्ग की बहालियों को लेकर विवाद गहरा गया है। आउटसोर्सिंग और दैनिक वेतन के आधार पर होने वाली इन नियुक्तियों में बाहरी लोगों को तरजीह दिए जाने के विरोध में मंगलवार को स्थानीय युवाओं ने मोर्चा खोल दिया है। झारखंड छात्र समन्वय समिति ने इस संबंध में अस्पताल के अधीक्षक को एक कड़ा शिकायती पत्र सौंपकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
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अस्पताल निर्माण के लिए जमीन देने वालों की हो रही उपेक्षा
छात्र समन्वय समिति द्वारा सौंपे गए आधिकारिक पत्र में साफ कहा गया है कि इस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण के लिए स्थानीय ग्रामीणों और भू-दाताओं ने अपनी कीमती जमीन दी है। लेकिन जब यहां रोजगार देने की बारी आई, तो उन्हीं जमीनदाताओं के बच्चों और स्थानीय योग्य युवाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। समिति का आरोप है कि युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
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युवाओं ने प्रशासन के सामने रखी ये प्रमुख मांगें:
* आउटसोर्सिंग और दैनिक वेतन वाले सभी पदों पर केवल और केवल स्थानीय उम्मीदवारों को 100% मौका मिले।
* अस्पताल के लिए जमीन देने वाले प्रभावित परिवारों के योग्य सदस्यों को नियमों के तहत पहली प्राथमिकता दी जाए।
* पूरी बहाली प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और योग्यता के आधार पर संचालित किया जाए।
* स्वीकृत खाली पदों की संख्या, चयन का पैमाना और फाइनल मेरिट लिस्ट को सार्वजनिक डोमेन में जारी किया जाए।
* स्थानीय युवाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए चयन समिति और पूरी प्रक्रिया के दौरान स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य हो।
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मांगें पूरी नहीं हुईं तो थमेगा अस्पताल का चक्का
अस्पताल अधीक्षक को यह ज्ञापन सौंपने के दौरान छात्र नेता श्याम देव हेम्ब्रम, राजीव बास्की और राजेंद्र मुर्मू समेत संगठन के कई दिग्गज पदाधिकारी और दर्जनों की संख्या में स्थानीय युवा मौजूद रहे। युवाओं के हस्ताक्षर वाली सूची भी प्रशासनिक अधिकारियों को रिसीव कराई गई है। छात्र नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो दुमका की सड़कों पर एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा।


