नई दिल्ली । नेपाल में बाढ़ से हुई तबाह में घर, गाड़ियां, सड़कें और पुल तक बह गए। इस तबाही के बाद कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और उनके परिवार उनका इंतजार कर रहे हैं। अब इन लापता लोगों की पहचान के लिए डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है। काठमांडू में तैनात भारतीय फॉरेंसिक टीम 3,000 डीएनए सैंपल पर काम कर रही है और अब तक 1200 से ज्यादा प्रोफाइल तैयार कर चुकी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नेपाल में भारतीय टीम कई लैबोरेटरी में अपने नेपाली सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रही है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारतीय फॉरेंसिक टीम को करीब 3,000 डीएनए सैंपल की जांच करनी है। इनमें से अब तक 1200 से ज्यादा डीएनए प्रोफाइल तैयार किए जा चुके हैं। जायसवाल ने बताया कि पहले भारत ने नेपाल में 275 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। अब लापता लोगों के परिवारों को नेपाल अधिकारियों से अपनों की जानकारी मिलने का इंतजार है। फिलहाल डीएनए प्रोफाइल की मदद से सैंपल का मिलान कर लापता लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
अब इस आपदा के 29 दिन बाद सबसे बड़ी चुनौती है लापता लोगों का पता लगाना और उनकी पहचान करना। ऐसे में काठमांडू में चल रही डीएनए जांच उन परिवारों के लिए एक उम्मीद की रोशनी है, जो अब तक अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय फॉरेंसिक टीम की जांच अभी जारी है। अब नजर इस बात पर है कि डीएनए प्रोफाइल के मिलान से कितने लापता लोगों की पहचान हो पाती है और नेपाल के अधिकारी भारतीय नागरिकों के बारे में आगे क्या जानकारी साझा करते हैं।


