डॉ.सुमन सिंह
संताल परगना प्रभारी
19 सितंबर का दिन संताल परगना की पत्रकारिता के लिए एक खास दिन है। दुमका से प्रकाशित द्विभाषीय हिंदी-संताली दैनिक ‘संताल एक्सप्रेस’ अपने प्रकाशन के नौवें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह केवल किसी अखबार की वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस पत्रकारिता यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसने संताल परगना के सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसरोकारों को हिंदी और संताली,दोनों भाषाओं में एक साथ सामने लाने का प्रयास किया है।
किसी नए अखबार को शुरू करना आसान नहीं होता। खासकर ऐसे क्षेत्र में, जहां स्थापित मीडिया संस्थानों के बीच अपनी पहचान बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। संस्थापक प्रधान संपादक अशोक कुमार जी ने सीमित संसाधनों के बावजूद जिस संकल्प और संघर्ष के साथ इस अखबार की नींव रखी, वह अपने आप में प्रेरणादायी कहानी है। स्थापना काल से ही उनके संघर्षों में साथ रहने का अवसर मुझे मिला है। इसलिए इस यात्रा को मैंने केवल एक पत्रकार के रूप में नहीं, बल्कि एक सहभागी के रूप में भी देखा है।
इस अखबार की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका द्विभाषीय स्वरूप है। संताल परगना की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक पहचान में संताली भाषा का विशेष महत्व है। हिंदी के साथ संताली को अखबार की पत्रकारिता का अभिन्न हिस्सा बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल रही है। स्थानीय संपादक और वरिष्ठ संताली साहित्यकार चुंडा सोरेन ‘सिपाही’ जी जैसे साहित्य और भाषा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व का जुड़ाव इस प्रयास को विशेष मजबूती देता है। उनके अनुभव और संताली भाषा-साहित्य के प्रति गहरी प्रतिबद्धता से अखबार के संताली स्वरूप को व्यापक आधार मिला है।
इससे संताली भाषी पाठकों को अपनी भाषा में समाचार और विचार पढ़ने का अवसर मिला, वहीं हिंदी पाठकों को भी संताल समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा और समस्याओं को अधिक करीब से समझने का माध्यम मिला।इसका सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम बनी। इस अखबार की उपयोगिता केवल सामान्य पाठकों तक सीमित नहीं है। संताली भाषा और साहित्य पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए भी यह एक उपयोगी मंच बना है। उन्हें संताली में प्रकाशित समाचार, सामाजिक-सांस्कृतिक सामग्री, साहित्यिक अभिव्यक्तियों और समसामयिक विषयों से परिचित होने का अवसर मिलता है।
किसी भी भाषा के विकास में उसके नियमित सार्वजनिक प्रयोग की बड़ी भूमिका होती है। जब विद्यार्थी अपनी भाषा को अखबार जैसे व्यापक माध्यम में पढ़ते हैं तो उनके शब्द-भंडार, भाषा-बोध और समसामयिक विषयों पर अभिव्यक्ति की क्षमता को भी लाभ मिलता है। संताली भाषा के विद्यार्थियों के लिए यह सामग्री अध्ययन और संदर्भ के स्तर पर भी उपयोगी हो सकती है।इस दृष्टि से यह अखबार केवल समाचार पत्र नहीं, बल्कि संताली भाषा के सार्वजनिक विस्तार और नई पीढ़ी से उसके जुड़ाव का एक माध्यम भी है।
संताल परगना की पत्रकारिता का वास्तविक चेहरा उसके गांवों, प्रखंडों और दूरदराज के इलाकों में दिखाई देता है। यहां की समस्याएं केवल जिला मुख्यालय की खबरें नहीं हैं। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार, वनाधिकार, जमीन, कृषि, आदिवासी समाज, स्थानीय बाजार और पंचायत स्तर के विकास कार्य आम लोगों के जीवन से सीधे जुड़े सवाल हैं।’संताल एक्सप्रेस’ ने इन मुद्दों को लगातार जगह देकर स्थानीय पत्रकारिता को मजबूत करने का प्रयास किया है। पत्रकारिता का यह सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक दायित्व है कि जिनकी आवाज दूर तक नहीं पहुंचती, उनकी आवाज को एक मंच देना।
संताल परगना जैसे क्षेत्र में इस भूमिका का महत्व और बढ़ जाता है। यहां अखबार की खबर कई बार केवल सूचना नहीं रहती, बल्कि समस्या के समाधान की प्रक्रिया को गति देने वाला माध्यम बन जाती है।
स्थानीय पत्रकार जब अपने क्षेत्र की समस्या को स्वयं देखते, समझते और रिपोर्ट करते हैं तो समाचार में जमीनी हकीकत दिखाई देती है। यही स्थानीय पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत है।
हम गुजरे सफर को पीछे मुड़कर देखें तो हमारे अनेक संघर्ष, चुनौतियां और उपलब्धियां दिखाई देती हैं। लेकिन किसी भी अखबार की वास्तविक भूमिका केवल उसके प्रसार या पाठकों की संख्या से तय नहीं होती। उसकी सार्थकता इस बात से भी तय होती है कि वह अपने समाज के कितने करीब है और लोगों के कितने काम आता है।
आज यह अखबार हिंदी के साथ-साथ संताली पाठकों के बीच भी अपनी पहचान बना चुका है। यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संपादकीय टीम, संवाददाताओं, कर्मचारियों, पाठकों और उन सभी लोगों की सामूहिक यात्रा है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में इस प्रयास पर विश्वास बनाए रखा।
स्थापना काल से इस यात्रा का सहभागी होने के नाते मेरे लिए यह वर्षगांठ व्यक्तिगत रूप से भी विशेष है। मैंने संस्थापक प्रधान संपादक अशोक कुमार जी को इस अखबार को स्थापित करने के लिए संघर्ष करते देखा है। उनके साथ कदम मिलाकर इस यात्रा में शामिल रहने का अवसर मेरे लिए पत्रकारिता जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव रहा है।
संताल परगना तेजी से बदल रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, पर्यटन, कृषि, खनिज संसाधन, आदिवासी अधिकार, पर्यावरण और क्षेत्रीय विकास से जुड़े नए सवाल सामने आ रहे हैं। इनके बीच स्थानीय पत्रकारिता की जिम्मेदारी भी बढ़ रही है। आने वाले वर्षों में उम्मीद है कि ‘संताल एक्सप्रेस’ अखबार और अधिक निर्भीकता, निष्पक्षता और जनसरोकार के साथ अपनी भूमिका निभाएगा। हिंदी और संताली दोनों भाषाओं के पाठकों को साथ लेकर यह यात्रा संताल परगना की आवाज को और व्यापक मंच प्रदान करेगी।स्थापना दिवस पर अखबार से जुड़े सभी साथियों, पाठकों, संवाददाताओं और शुभचिंतकों को हार्दिक शुभकामनाएं।


