◆2001 में शुरू हुआ था सफर,आज 29 केंद्रों में 4 हजार से अधिक बच्चे सीख रहे हिंदी भाषा
◆हिंदी भाषा के साथ भारतीय संस्कृति और विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल
डॉ.सुमन सिंह
दुमका। विदेश में पली-बढ़ी भारतीय मूल की नई पीढ़ी अपनी जड़ों से कितनी जुड़ी रहेगी? यह सवाल केवल भाषा का नहीं, बल्कि पहचान और सांस्कृतिक विरासत का भी है। अमेरिका में काम कर रही ‘हिंदी यूएसए’ इसी चुनौती का जवाब अपने अलग तरीके से दे रही है। संस्था बच्चों को हिंदी पढ़ाने के साथ उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा और अपनी विरासत से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
वर्ष 2001 में न्यू जर्सी से शुरू हुई ‘हिंदी यूएसए’ आज अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में हिंदी पाठशालाओं का नेटवर्क खड़ा कर चुकी है। संस्था के अनुसार शुरुआत महज दो विद्यार्थियों और एक शिक्षक से हुई थी। बाद के वर्षों में इसका विस्तार होता गया और अब इससे 4 हजार से अधिक विद्यार्थी एवं 350 से अधिक शिक्षक जुड़े हैं। संस्था खुद को गैर-लाभकारी और स्वयंसेवी संगठन बताती है।’हिंदी यूएसए’ की स्थापना के पीछे सोच सिर्फ हिंदी भाषा का प्रचार करना नहीं थी। संस्था के अनुसार इसके संस्थापकों का मानना था कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और परंपराएं भाषा से गहराई से जुड़ी हैं। इसलिए अमेरिका में रह रही भारतीय मूल की नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ना भारतीय सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने का भी माध्यम है।
नवंबर 2001 में एडिसन, न्यू जर्सी में संस्था की नींव रखी गई। इसके गठन में देवेंद्र सिंह, रचिता सिंह, राज मित्तल, सुमन मित्तल और स्वर्गीय दिग्विजय म्यूर सहित कई हिंदी प्रेमियों की भूमिका रही। देवेंद्र सिंह को संस्थापक अध्यक्ष हैं।
‘हिंदी यूएसए’ की अमेरिका में 29 शाखाएं हैं,जिनमें न्यू जर्सी के अलावा कनेक्टिकट, कैलिफोर्निया, जॉर्जिया, मैरीलैंड, मैसाचुसेट्स और मिसौरी जैसे राज्यों में संचालित हिंदी पाठशालाएं शामिल हैं। इनके अलावा संस्था का एक ऑनलाइन स्कूल भी है, जिससे उन स्थानों के बच्चे जुड़ सकते हैं जहां संस्था की शाखा नहीं है।
न्यू जर्सी में संस्था का मुख्यालय है। एडिसन, ईस्ट ब्रंसविक, जर्सी सिटी, लॉरेंसविल, मोनरो, मॉन्टगोमरी, नॉर्थ ब्रंसविक, पिस्काटवे, साउथ ब्रंसविक, वेस्ट विंडसर-प्लेंसबोरो और वुडब्रिज समेत कई स्थानों पर हिंदी पाठशालाएं चल रही हैं।
‘हिंदी यूएसए’ का शिक्षा मॉडल भी व्यवस्थित है। वर्ष 2026-27 के लिए संस्था ने पांच वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश की व्यवस्था की है। पाठ्यक्रम में नौ स्तर हैं, जो स्टार्टर-1 से एडवांस्ड-2 तक जाते हैं। बच्चों को पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता विकसित करने के लिए किताबों, सॉफ्टवेयर और निर्धारित पाठ्यक्रम का इस्तेमाल किया जाता है।’हिंदी यूएसए’ के घोषित उद्देश्यों में विभिन्न स्तरों का पाठ्यक्रम तैयार करना, शिक्षकों को प्रशिक्षण देना और हर वर्ष मौखिक और लिखित परीक्षाएं आयोजित करना शामिल है। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए पदक भी दिए जाते हैं।भाषा सीखने को बच्चों के लिए रोचक बनाने के लिए संस्था उन्हें कविता पाठ और वार्षिक हिंदी महोत्सव जैसी गतिविधियों से भी जोड़ती है।
‘हिंदी यूएसए’ का वार्षिक हिंदी महोत्सव इसकी गतिविधियों का प्रमुख आकर्षण है। वर्ष 2026 में आयोजित महोत्सव संस्था का 25वां हिंदी महोत्सव था और इसे रजत जयंती वर्ष के रूप में मनाया गया। 16 और 17 मई को न्यू जर्सी के साउथ रिवर हाई स्कूल में आयोजित इस आयोजन में सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के साथ विराट कवि सम्मेलन भी हुआ।इस तरह पाठशाला में सीखी गई भाषा कक्षा की चहारदीवारी से निकलकर मंच, कविता, कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का माध्यम बनती है।
हिंदी यूएसए की एक महत्वपूर्ण गतिविधि उसकी वार्षिक पत्रिका ‘कर्मभूमि’ है। संस्था के अनुसार यह पत्रिका हिंदी के प्रति जागरूकता, लेखन के प्रति सक्रियता और काव्य के प्रति रचनात्मकता को बढ़ावा देने का माध्यम है। हिंदी यूएसए की खासियत इसका स्वयंसेवी मॉडल है। संस्था के अनुसार उसके 500 से अधिक विद्यार्थी स्नातक हो चुके हैं और उनमें से कई आगे चलकर सहायक शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। यानी जिस बच्चे ने कभी यहां हिंदी सीखी, वही आगे चलकर दूसरे बच्चों को हिंदी सिखाने में योगदान दे सकता है।
संस्था के स्वयंसेवकों को अमेरिकी सरकार के प्रेसिडेंट्स वॉलंटियर सर्विस अवॉर्ड के लिए प्रमाणित करने की सुविधा भी उपलब्ध है।
‘हिंदी यूएसए’ की गतिविधियों में भाषा और संस्कृति को अलग-अलग नहीं देखा जाता। संस्था के घोषित उद्देश्य में हिंदी के साथ भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार को भी शामिल किया गया है। इसके कार्यक्रमों में हिंदी महोत्सव के अलावा विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। संस्था की वर्तमान गतिविधियों में गणपति विसर्जन उत्सव तथा नवरात्रि-दीपावली समारोह जैसे कार्यक्रम भी सूचीबद्ध हैं।इस तरह अमेरिका में जन्मे बच्चे हिंदी सीखते हुए भारतीय त्योहारों, परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से भी परिचित होते हैं।
प्रवासी भारतीय परिवारों की तीसरी और चौथी पीढ़ी के सामने अपनी पारिवारिक भाषा को बनाए रखना आसान नहीं होता। घर में अंग्रेजी का बढ़ता इस्तेमाल, अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक वातावरण बच्चों को धीरे-धीरे भारतीय भाषाओं से दूर कर सकता है।ऐसे माहौल में हिंदी यूएसए का मॉडल महत्वपूर्ण दिखाई देता है।


