मुंबई । नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए मुंबई और महाराष्ट्र के 60 पर्यटकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है। इन यात्रियों के नेपाल-चीन सीमा के पास स्थित रसुवागढ़ी इमिग्रेशन सेंटर के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इन पर्यटकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यह समूह मुंबई के अंधेरी निवासी डॉक्टर मिलिंद चितले की ‘हिल्स एंड ट्रेल्स’ के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया था। ख़बरों के अनुसार, समूह में महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों से आए 60 भारतीय यात्री शामिल थे। 26 अगस्त को यात्री नेपाल-चीन सीमा स्थित इमिग्रेशन भवन में पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक आई बाढ़ और भारी मलबे ने इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। इमिग्रेशन और कस्टम की इमारत भी मलबे में दब गई।
– 40 से 50 फीट मलबे में दबे होने की आशंका
स्थानीय हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बताए जा रहे हैं। भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और कीचड़ जमा होने के कारण राहत एवं बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। कुछ रिपोर्टों में यात्रियों के 40 से 50 फीट तक मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई है। घटनास्थल पर बचाव अभियान के लिए हेलिकॉप्टर की मदद ली जा रही है, लेकिन भारी मलबे के कारण अभियान बेहद कठिन बना हुआ है।
– परिजनों की बढ़ी चिंता
लापता यात्रियों के परिवारों से अधिकारियों ने संपर्क किया है। भारतीय अधिकारियों और दूतावास के माध्यम से यात्रियों की जानकारी जुटाने के प्रयास जारी हैं। राज्य सरकार के अनुसार, नेपाल में फंसे महाराष्ट्र के 404 लोगों में से 338 से संपर्क स्थापित हो चुका था, जबकि 60 पर्यटकों का अब तक पता नहीं चल पाया है।
– 37 श्रद्धालु सुरक्षित मुंबई लौटे
इस बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े 37 श्रद्धालु सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार और अन्य एजेंसियां नेपाल में फंसे नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार समन्वय कर रही हैं। फिलहाल लापता 60 यात्रियों के परिवारों की निगाहें राहत और बचाव अभियान पर टिकी हैं। प्रशासन की ओर से यात्रियों की स्थिति की पुष्टि के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।


