जमशेदपुर। वर्ष 2026 के मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण के बाद 5 अगस्त को सरकारी पोर्टल पर अपलोड हुई नई वोटर लिस्ट ने सुधार के दावों की पोल खोल कर रख दी है। इसे देखकर जनता अब एक ही सवाल पूछ रही है—”आखिर क्यों आवश्यक था इस प्रहसन का?”
जब ज़मीनी हकीकत पर नज़र रखने वाले एक जागरूक नागरिक ने अपने आस-पास के 4 भागों (5-6 मोहल्लों) की सूची का बारीकी से विश्लेषण किया, तो ऐसे चौंकाने वाले और हास्यास्पद तथ्य सामने आए जो चुनावी तंत्र की संवेदनशीलता और कार्यकुशलता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इस तथाकथित ‘गहन सुधार’ के खेल में जो बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं,
नाम की हिज्जे का कबाड़ा: 70% गलतियां
मतदाताओं ने अपने हाथों से फॉर्म भरकर जमा किए थे, यानी उन्होंने अपना नाम सही लिखा था। इसके बावजूद 70% नामों की स्पेलिंग गलत पाई गई है। डेटा एंट्री ऑपरेटरों की इस लापरवाही ने लोगों के नाम का हुलिया ही बदल कर रख दिया है।
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उम्र का मज़ाक: 30% आंकड़े फर्जी
फॉर्म में जन्मतिथि स्पष्ट लिखवाने के बाद भी 30% मतदाताओं की उम्र गलत दर्ज है। इसके कुछ नमूने तो तर्क और विज्ञान को ही चुनौती दे रहे हैं:
* कुदरत का अजूबा: सूची के अनुसार बेटे की उम्र 66 साल है और उसे जन्म देने वाली मां महज 57 साल की है!
* रिटायरमेंट का गणित फेल: जो सरकारी कर्मचारी 2022 में 59 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो चुका है, उसे 4 साल बाद यानी 2026 में भी सूची में 59 साल का ही दिखाया जा रहा है।
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बिखर गए परिवार: 10% लोग अपनों से दूर
परिवार के मुखिया ने अपने सभी सदस्यों के फॉर्म एक साथ, एक बंडल में जमा किए थे। इसके बावजूद 10% मतदाताओं के नाम अपने परिवार से अलग कर दिए गए हैं। वे अपने ही घर के सदस्यों के साथ न होकर किसी दूसरे भाग या सूची में इधर-उधर भटक रहे हैं।
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रिश्तों का घालमेल: बिना शादी के मिल गए ‘पति’
अधिकारियों की लापरवाही का सबसे असंवेदनशील चेहरा ‘संबंध’ वाले कॉलम में दिखा। जहां पिता के नाम की जगह पति का नाम दर्ज कर दिया गया। विडंबना देखिए, यह उन युवतियों के साथ हुआ है जिनकी अभी तक शादी भी नहीं हुई है!
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बड़ा सवाल: यह पुनरीक्षण था या सिर्फ औपचारिकता?
जब मतदाता ने खुद सही जानकारी लिखकर दी, तो सरकारी पोर्टल पर उसे इस कदर विकृत करके क्यों अपलोड किया गया? करोड़ों रुपये फूंकने और ‘गहन पुनरीक्षण’ का ढिंढोरा पीटने के बाद अगर जनता को अपनी पहचान और रिश्तों को साबित करने के लिए दोबारा लाइनों में लगना पड़े, तो इस पूरी प्रक्रिया को ‘प्रहसन’ के अलावा और क्या नाम दिया जाए।
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