नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 31,522 करोड़ रुपए जुटाए हैं, जो भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) बन गया है। इसे अत्यधिक गोपनीयता के साथ अंजाम दिया गया, जिससे बाजार को अंतिम समय तक इसकी भनक नहीं लगी। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य ट्रेडर्स को पहले से पोजीशन बनाने और शेयर मूल्य पर अनावश्यक दबाव डालने से रोकना था।
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार, डील से जुड़े निवेश बैंकों को भी अलग-अलग समय पर सूचना दी गई; कुछ को तो स्टॉक एक्सचेंज में घोषणा से ठीक पहले ही जानकारी मिली। कोर टीम के अलावा, बाकी सलाहकारों को बाजार बंद होने के बाद ही शामिल किया गया। सरकार ने बाजार की उम्मीदों के विपरीत एलआईसी के तिमाही नतीजों से पहले ही ओएफएस लॉन्च किया। अधिकारियों का मानना था कि यह कदम शेयर की कीमत स्थिर रखने और निवेशकों की रुचि बनाए रखने में सहायक होगा। शुरुआती 2.5 फीसदी हिस्सेदारी के प्रस्ताव को संस्थागत निवेशकों ने 3.32 गुना सब्सक्राइब किया, जिसके बाद सरकार ने 4 फीसदी अतिरिक्त ग्रीन शू विकल्प का भी सफलतापूर्वक उपयोग कर कुल 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बेची। खास बात यह रही कि इस डील में शामिल किसी भी निवेश बैंक ने एडवाइजरी फीस नहीं ली।


