नई दिल्ली । यदि कभी-कभार रात के तीन बजे नींद खुल जाती हो तो कोई चिंता की बात नहीं है, लेकिन बार-बार ऐसा होने पर इसके कारणों को समझना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की जैविक घड़ी यानी बॉडी क्लॉक पूरे सोने-जागने के चक्र को नियंत्रित करती है। रात के शुरुआती हिस्से में गहरी नींद अधिक आती है, जबकि लगभग तीन बजे के बाद नींद स्वाभाविक रूप से हल्की होने लगती है। ऐसे में हल्की आवाज, कमरे के तापमान में बदलाव या मामूली हलचल भी व्यक्ति को जगा सकती है। यही कारण है कि कई लोगों की नींद इसी समय टूट जाती है। एक अन्य महत्वपूर्ण वजह कॉर्टिसोल हार्मोन है। सुबह शरीर को जागने के लिए तैयार करने की प्रक्रिया के तहत तीन से चार बजे के बीच इसका स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से तनाव, चिंता या अत्यधिक मानसिक दबाव में रहता है, तो कॉर्टिसोल सामान्य से अधिक सक्रिय हो सकता है। इससे मस्तिष्क सतर्क हो जाता है और नींद बार-बार टूटने लगती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि रात के अंतिम हिस्से में रैपिड आई मूवमेंट (आरईएम) नींद की अवधि भी बढ़ जाती है।
यह गहरी नींद की तुलना में हल्की होती है। इसलिए इस दौरान हल्की रोशनी, मोबाइल की नोटिफिकेशन, कमरे का तापमान या आसपास की आवाज जैसी छोटी-छोटी चीजें भी व्यक्ति को जगा सकती हैं।
ब्लड शुगर और पाचन तंत्र भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। रात में रक्त शर्करा का स्तर अचानक कम होने पर शरीर संतुलन बनाए रखने के लिए ग्लूकोज छोड़ता है, जिससे बेचैनी महसूस हो सकती है। वहीं देर रात भारी, तला-भुना या मसालेदार भोजन करने से एसिडिटी, गैस और अपच की समस्या पैदा हो सकती है, जो रात में नींद टूटने का कारण बनती है। बढ़ती उम्र के साथ हार्मोनल बदलाव भी नींद के पैटर्न को प्रभावित करते हैं। महिलाओं में गर्भावस्था, रजोनिवृत्ति या थायरॉयड संबंधी समस्याओं के दौरान हार्मोन में होने वाले परिवर्तन रात में गर्मी लगना, बेचैनी और बार-बार नींद खुलने जैसी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ अन्य चिकित्सीय स्थितियां भी नींद में व्यवधान डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रात में तीन बजे के आसपास कभी-कभार नींद खुलती है तो यह सामान्य शारीरिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, दिनभर थकान महसूस हो या दैनिक जीवन प्रभावित होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।


