सर्वेक्षण: नागालैंड में 99.8 फीसदी लोग मांसाहारी, राजस्थान शाकाहार राज्य
नई दिल्ली । भारत को शाकाहारी देश माने जाने की आम धारणा के उलट, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के नए आंकड़ों ने एक अलग ही तस्वीर पेश की है। इन आंकड़ों के मुताबिक देश की करीब 70 से 75 फीसदी आबादी मांसाहार, मछली या अंडे का सेवन करती है। सर्वेक्षण में नागालैंड को सबसे ज्यादा मांसाहारी राज्य बताया गया है, जहां करीब पूरी आबादी मांसाहारी है, जबकि राजस्थान शाकाहार के मामले में शीर्ष पर है। मीडिया रिपोर्ट में सर्वेक्षण के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि नागालैंड देश का सबसे ज्यादा मांसाहारी खाना खाने वाला राज्य है, जहां आश्चर्यजनक रूप से 99.8 फीसदी लोग मांस, मछली या अंडे का सेवन करते हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल 99.3फीसदी, केरल 99.1फीसदी, आंध्र प्रदेश 98.25फीसदी, तेलंगाना 98.07फीसदी, तमिलनाडु 97.65फीसदी, ओडिशा 97.35फीसदी, झारखंड 96.75फीसदी, त्रिपुरा 95फीसदी और गोवा 93.8फीसदी जैसे राज्य हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इन राज्यों में मांसाहार की अधिकता के पीछे कई भौगोलिक और सांस्कृतिक कारण बताए गए हैं। विशेष रूप से, पूर्वोत्तर के राज्यों में गहरी जनजातीय संस्कृति का प्रभाव है, जहां मांसाहार सदियों से भोजन का अभिन्न अंग रहा है। वहीं, केरल, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में समुद्री भोजन की आसान उपलब्धता और स्थानीय परंपराओं तथा जलवायु ने इसे रोज के खाने का हिस्सा बना दिया है। इसके विपरीत भारत के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से शाकाहार में अग्रणी हैं।
राजस्थान देश का सबसे बड़ा शाकाहारी राज्य है, जहां करीब 74.9 फीसदी आबादी पूरी तरह शाकाहारी जीवनशैली अपनाती है। हरियाणा 70फीसदी, पंजाब 66फीसदी, गुजरात 61फीसदी और मध्य प्रदेश 50फीसदी शाकाहार को प्राथमिकता देने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जैन और वैष्णव परंपराओं का गहरा प्रभाव देखा जा सकता है, साथ ही दूध, दही और घी पर आधारित पारंपरिक भोजन संस्कृति ने भी शाकाहार को अत्यधिक बढ़ावा दिया है। दिलचस्प बात यह भी है कि देश में पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा शाकाहारी हैं; करीब 25फीसदी महिलाएं खुद को सख्त शाकाहारी बताती हैं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा करीब 13फीसदी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में एक स्पष्ट शाकाहारी बेल्ट है, जो मुख्य रूप से उत्तर और पश्चिम भारत में केंद्रित है, जबकि दक्षिण, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में मांसाहार एक सामान्य जीवनशैली का हिस्सा है। भोजन की यह विविधता मात्र स्वाद का मामला नहीं है, बल्कि यह देश की धर्म, संस्कृति, जलवायु, खेती के तरीकों, समुद्री संसाधनों, जंगलों और स्थानीय परंपराओं का एक गहरा प्रतिबिंब है, जो भारत की अनूठी बहुलवादी पहचान को दर्शाता है।


