शत्रुघ्न प्रसाद
विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला, 2026 का विधिवत शुभारम्भ झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार व दीपिका पांडेय सिंह तथा अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना कर मेले का पारंपरिक व भव्य प्रारम्भ किया गया। उद्घाटन के समय स्थानीय विधायक, निगम एवं जिला पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस वर्ष मेले का आयोजन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक निर्धारित किया गया है। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा के लिए कई आधुनिक कदम उठाए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए एआई आधारित निगरानी प्रणाली, ANPR व फेस‑रिकॉग्निशन कैमरे तथा हेडकाउंट सिस्टम लगाए गए हैं। शिकायत निवारण के लिए QR‑कोड आधारित प्रणाली लागू की गई है, जिससे समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने हेतु दुम्मा सीमा पर नवनिर्मित अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र और संकीर्ण मार्गों के लिए ‘टोटो एम्बुलेंस’ सेवा शुरू की गई है। अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र में 24×7 चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध रहेंगे तथा प्राथमिक उपचार, ORS व जीवनरक्षक दवाइयों की व्यवस्था की गई है। श्रावणी मेला में श्रद्धालुओं के अनुभव को समृद्ध करने के लिए शिवलोक परिसर में भव्य ड्रोन शो, लेजर लाइट और लाइट‑एंड‑साउंड शो एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। पहले दिन आयोजित ड्रोन शो ने पूरे क्षेत्र में दर्शनीय दृश्य प्रस्तुत किए और श्रद्धालुओं में उत्साह भर दिया। साथ ही कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग कर सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया व पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने सभी संबंधित अधिकारियों को पेयजल, स्वच्छता, बिजली व सुरक्षा में कोई कोताही न बरतने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन का उद्देश्य प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सुगम और भावनात्मक रूप से समृद्ध अनुभव प्रदान कराना है
हर वर्ष की तरह, इस बार भी तैयारियां कई महीने पहले शुरू कर दी गई थीं। झारखंड और बिहार सरकारें, रेलवे, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, शहरी स्थानीय निकाय, विद्युत, जलापूर्ति, परिवहन, आपदा प्रबंधन विभाग और अनेक सामाजिक संगठन मिलकर महीने भर के आयोजन को सुचारू रूप से चलाने के लिए काम कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष तकनीक-आधारित निगरानी, बेहतर भीड़ प्रबंधन और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
————————————————————————–
तीर्थयात्रा मार्ग और प्रमुख विश्रामस्थल
कांवड़ यात्रा सुल्तानगंज से शुरू होती है, जहां भक्त गंगा का जल लेकर भागलपुर, बांका, झारखंड सीमा होते हुए देवघर पहुँचते हैं और बाबा वैद्यनाथ मंदिर पर जलाभिषेक करते हैं।
बहुत से तीर्थयात्री इसके बाद बासुकीनाथ धाम भी जाते हैं, जो इस परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
यह मार्ग आज अनुशासन, सहनशीलता, संयम और सामूहिक आस्था का प्रतीक बन गया है और श्रावण के दौरान यह पूरा क्षेत्र एक विशाल आध्यात्मिक संमोह में बदल जाता है।
————————————————————————–
बिहार-झारखंड का संयुक्त समन्वय
क्योंकि यात्रा बिहार से शुरू होकर झारखंड में समाप्त होती है, दोनों राज्यों के प्रशासन के बीच घनिष्ठ समन्वय आवश्यक है।
भागलपुर, बांका, मुंगेर, सुल्तानगंज और देवघर के जिला प्रशासन के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की जा रही हैं। रेलवे, पुलिस, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन, शहरी निकाय, विद्युत, जलापूर्ति और परिवहन समेत कई विभाग पूरे मार्ग में व्यवस्थाओं की संयुक्त रूप से निगरानी कर रहे हैं।
सड़कों की मरम्मत, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, पेयजल, विश्राम स्थल, शौचालय, चिकित्सा शिविर और कंट्रोल रूम मेले की शुरुआत से पहले ही स्थापित किए जा रहे हैं।
————————————————————————–
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
श्रावनी मेले में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस वर्ष लगभग 14,000 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। अधिकारी निरंतर निगरानी के लिए एआई आधारित इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम, ड्रोन और हाई-रिज़ॉल्यूशन CCTV कैमरों का उपयोग कर रहे हैं।
अस्थायी पुलिस चौकियां, यातायात नियंत्रण इकाइयाँ और भीड़ प्रबंधन केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। आपदा प्रतिक्रिया टीमें और फायर सर्विस आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए सतर्क हैं।
————————————————————————–
स्वास्थ्य सेवाएँ
लाखों भक्तों की उपस्थिति को देखते हुए व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्थाएँ की गई हैं।
अस्थायी अस्पताल, चिकित्सा शिविर, डॉक्टर, पैरामेडिक्स, एम्बुलेंस और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए ई-रिक्शा एम्बुलेंस (टोतो एम्बुलेंस) तैनात किए गए हैं।
प्रमुख स्थानों पर प्राथमिक चिकित्सा, दवाइयाँ, ORS, आपातकालीन उपचार और विशेषकर गर्मी से संबंधित रोगों, थकान तथा चोटों के इलाज हेतु मेडिकल टीमें नियुक्त हैं।
—————————————————– ———————
स्वच्छता और पेयजल
महीने भर आयोजन के दौरान स्वच्छता बनाए रखना एक बड़ा प्रशासनिक चुनौती है।
लगभग 750 सफाईकर्मियों को सात ऑपरेशनल जोनों में तैनात किया गया है। वैज्ञानिक कचरा निपटान, नियमित सफाई, फॉगिंग और स्वच्छता अभियान पूरे मेले में चलाए जा रहे हैं।
पुर्ती पेयजल सुविधा, मोबाइल शौचालय, स्नान सुविधाएँ और अन्य स्वच्छता अवसंरचनाएँ भक्तों के लिए उपलब्ध करवाई गई हैं।
————————————————————————–
यातायात और परिवहन प्रबंधन
मेला के दौरान यातायात प्रबंधन एक महत्वपूर्ण घटक है।
एकतरफा यातायात प्रणाली लागू की गई है, साथ ही निर्दिष्ट पार्किंग क्षेत्र, बैरिकेडिंग और वैकल्पिक मार्ग बनाए गए हैं। भारतीय रेलवे ने विशेष ट्रेनें और अतिरिक्त कोच चलाए हैं तथा रेलवे स्टेशनों पर मदद काउंटर स्थापित किए गए हैं। बस सेवाएँ भी तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए बढ़ाई गई हैं।
————————————————————————–
अस्थायी आवास व्यवस्था
लम्बी दूरी तय करने वाले कांवड़ियों के लिए अस्थायी टेंट सिटी, धर्मशालाएँ और विश्राम शिविर बनाए गए हैं।
महिलाओं, बुज़ुर्गों और अन्य संवेदनशील तीर्थयात्रियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। ये शिविर रहने, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहायता और विश्राम सुविधाएँ प्रदान करते हैं।
————————————————————————–
आर्थिक महत्व
धार्मिक महत्व के अलावा श्रावनी मेला क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।
होटल, धर्मशाला, परिवहन ऑपरेटर, फूल और पूजा सामग्री के विक्रेता, हस्तशिल्प कारीगर और छोटी दुकाने मेले के दौरान अच्छी आय प्राप्त करती हैं। देवघर, सुल्तानगंज, भागलपुर, बांका और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था तीर्थयात्रा के कारण पर्यटन, व्यापार, रोजगार और अस्थायी व्यवसायिक अवसरों के माध्यम से मजबूत होती है। राजकीय श्रावनी मेला 2026 आस्था, परंपरा, संस्कृति और आधुनिक प्रशासनिक दक्षता का भव्य संगम प्रस्तुत करता है। करोड़ों श्रद्धालु, दो राज्यों के संयुक्त प्रयास, उन्नत तकनीक, कुशल प्रशासन और सामाजिक संगठनों की निस्वार्थ सेवा इस मेले को देश के सबसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक धार्मिक आयोजनों में से एक बनाती है।
————————————————————————–
22 मंदिर और उनका ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
वैद्यनाथ धाम, देवघर में स्थित, शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और पारंपरिक रूप से 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मंदिर परिसर में लगभग 22 मंदिर सम्मिलित हैं और यह भारत के महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। यह क्षेत्र शैव, शाक्त और वैष्णव परंपराओं का एक अद्वितीय संगम प्रस्तुत करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और निर्माण: वैद्यनाथ धाम का धार्मिक महत्व प्राचीन पुराणों, विशेषकर शिव पुराण में मिलता है। वर्तमान मुख्य मंदिर के सामने वाले भाग का निर्माण 1596 ईस्वी में पुराणमल (गिद्धौर के शासकों के पूर्वज) द्वारा कराया गया माना जाता है। मुख्य मंदिर लगभग 72 फीट (22 मीटर) ऊँचा है और उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित है, जिसकी शिखर पर स्वर्ण कलश और पंचशूल विराजमान है।
22 मंदिरों में मुख्य रूप से शामिल हैं: बाबा वैद्यनाथ (ज्योतिर्लिंग), भगवती पार्वती मंदिर, गणेश मंदिर, काली मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, लक्ष्मी-नारायण मंदिर, सूर्य मंदिर, सरस्वती मंदिर, ब्रह्मा मंदिर, काल भैरव मंदिर, हनुमान मंदिर, राम-लक्ष्मण-सीता मंदिर, गंगा मंदिर, संध्या मंदिर, मानस देवी मंदिर, बगलामुखी मंदिर, कार्तिकेय मंदिर, नंदी मंदिर, गौरी मंदिर, सावित्री मंदिर, अतिरिक्त शिव मंदिर और अन्य उप-देवालय। स्थानीय परंपराओं में कुछ उप-देवालयों के नाम और क्रम में थोड़ी भिन्नता पाई जा सकती है, पर समग्र रूप में यह परिसर 22 मंदिरों के रूप में प्रचलित है।
————————————————————————–
झलकियां
* मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए देवघर जिला सीमा के भीतर डबल डेकर (दो मंजिला) माल वाहक एवं अन्य वाहनों के प्रवेश को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके लिए जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा सघन चेकिंग अभियान चलाया रहे हैं। अभियान के दौरान एक डबल डेकर वाहन से आ रहे कांवड़ियों को असुरक्षित स्थिति से निकालते हुए, सुरक्षित रूप से वाहन के अंदर बैठाया गया। इसके साथ ही जिला परिवहन पदाधिकारी ने सभी श्रद्धालुओं और वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा के नियमों के प्रति जागरूक किया और अपील की कि वे यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। देवघर आने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के सुगम पड़ाव और भीड़ नियंत्रण के उद्देश्य से इंटर स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) के अतिरिक्त 05 अन्य महत्वपूर्ण अस्थायी पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। इन पार्किंग स्थलों में कोठिया पार्किंग स्थल, परित्राण पार्किंग स्थल, सरसा पार्किंग स्थल, भलुवा पार्किंग स्थल और हथगड़ पार्किंग स्थल शामिल हैं। इन सभी चिन्हित पार्किंग स्थलों पर जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और वाहनों के सुव्यवस्थित पड़ाव की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
* राजकीय श्रावणी मेला 2026 के दौरान नगर निगम ने पूरे श्रावण मास के लिए मेला क्षेत्र में पशु वध और मांस-मछली बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद उल्लंघन की शिकायतें मिलने पर गोपनीय जांच दल ने कोरियासा, जसीडीह, बरमसिया और बैद्यनाथपुर में औचक निरीक्षण किया।
जसीडीह की रोशन मीट शॉप को सील कर दिया गया, जबकि जलाल मीट शॉप, बबलू मीट शॉप तथा अन्य दुकानों से कुल ₹7,500 जुर्माना वसूला गया और अंतिम चेतावनी दी गई। निगम ने स्पष्ट किया कि ऐसे अभियान जारी रहेंगे और सभी विक्रेताओं से आदेश का पालन करने की अपील की है।
* उपायुक्त ने इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए AI तकनीक का सटीक उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि भीड़ घनत्व, रूट और सुरक्षा मानकों की रीयल-टाइम निगरानी हो और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो।
उन्होंने बाबा मंदिर व आसपास के क्षेत्र में विशेष साफ-सफाई अभियान चलाने, 24×7 स्वच्छता बनाए रखने तथा अतिरिक्त सफाईकर्मियों की रोटेशन व त्वरित कचरा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
साथ ही सभी दंडाधिकारियों, पुलिस व सुरक्षा बलों को ‘सेवा भाव’ से काम करने का निर्देश दिया, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुखद अनुभव मिले।
* सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं एवं कांवरियों की सुविधा व सुरक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित भाव से कार्य कर रहा है। भारी भीड़ को देखते हुए विभाग ने सम्पूर्ण मेला क्षेत्र तथा कांवरिया पथ पर कुल 34 सूचना सह सहायता केन्द्रों का सफल संचालन किया है। इन केन्द्रों का मुख्य उद्देश्य मेला संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराना तथा भीड़ में अपने परिजनों से बिछुड़ गए श्रद्धालुओं की सहायता करना है। ये केन्द्र बिछुड़े कांवरियों को उनके अपनों से मिलाने और उन्हें सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण सेतु का कार्य कर रहे हैं।
* बिछुड़ों को अपनों से मिलाने का सशक्त माध्यम
मेला में विशाल जनसमूह के कारण कई श्रद्धालु अक्सर अपने परिवार या दल से अलग हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में इन 34 केन्द्रों पर तैनात कर्मी लाउडस्पीकर (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) के माध्यम से लगातार घोषणाएं कर रहे हैं। साथ ही विभिन्न केन्द्रों के बीच डिजिटल समन्वय और त्वरित सूचना प्रणाली के जरिए कम से कम समय में बिछुड़ों को उनके परिजनों से मिलाया जा रहा है, जिससे उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आ रही है।
शिवगंगा घाटों पर शिव के रूप
राजकीय श्रावणी मेला 2026 में देवघर नगर निगम ने शिवगंगा घाटों पर भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की शानदार 3D पेंटिंग्स तैयार की हैं। इन जीवंत कलाकृतियों में शिव की महिमा, त्रिशूल, डमरू और गंगावतरण के दृश्य सजीव ढंग से दर्शाए गए हैं, जिससे शिवगंगा परिसर बेहद भव्य और आकर्षक बन गया है।
ये पेंटिंग्स श्रद्धालुओं का मन मोह रही हैं और पूरे परिसर को बेहतरीन सेल्फी प्वाइंट में बदल दिया है। कांवरिया व स्थानीय लोग इनके साथ तस्वीरें खींचने और रील्स बनाने में व्यस्त हैं। नगर आयुक्त सुश्री सुलोचना मीना ने कहा कि इसका उद्देश्य हर शिवभक्त को सुखद व यादगार अनुभव देना है। यह पहल अध्यात्म और आधुनिक कला का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रही है।
* राजकीय श्रावणी मेला, 2026 के पहले दिन बाबा नगरी देवघर में श्रद्धालुओं का अपार उत्साह देखने को मिला ।सुबह 04:02 बजे से जलार्पण प्रारंभ हुआ। कुल 74,987 श्रद्धालुओं ने बाबा वैद्यनाथ का जलार्पण किया, जिसमें बाह्य अर्घा से 7,534, आंतरिक अर्घा से 63,466 तथा शीघ्र दर्शनम से 3,987 श्रद्धालु शामिल रहे।
दूसरे दिन सुबह 04:13 बजे से जलार्पण प्रारंभ हुआ। कुल 1,05,179 श्रद्धालुओं ने बाबा वैद्यनाथ का जलार्पण किया, जिसमें बाह्य अर्घा से 19,472, आंतरिक अर्घा से 81,985 तथा शीघ्र दर्शनम से 3,722 श्रद्धालु शामिल रहे।
तीसरे दिन सुबह 04:15 बजे से जलार्पण प्रारंभ हुआ। कुल 1,27,533 श्रद्धालुओं ने बाबा वैद्यनाथ का जलार्पण किया, जिसमें बाह्य अर्घा से 27,354, आंतरिक अर्घा से 94,528 तथा शीघ्र दर्शनम से 5,651 श्रद्धालु शामिल रहे।
* राजकीय श्रावणी मेला के दौरान बच्चों व महिला श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु रूट लाइन पर 10 चिन्हित स्थलों पर मातृत्व विश्राम गृह बनाए गए हैं। इनमें बैठने, पानी, बच्चों के लिए डायपर, सेनेटरी पैड और बिस्कुट जैसी निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही महिलाओं व बच्चों संबंधी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। सुविधा व सुरक्षा के लिए महिला कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है तथा पुरुषों का प्रवेश वर्जित रखा गया है।
————————————————————
शिवलोक परिसर में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा जीवंत प्रदर्शनी में कलाकृतियों, बाबा मंदिर का दिव्य प्रारूप, झारखंड के सांस्कृतिक रंगरूप के अलावा महादेव के विभिन्न रूपो के दर्शन हेतु बनाये गए जीवंत विभिन्न कलाकृतियों व कलाकारों के कार्यों की सराहना की। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि शिवलोक परिसर में श्रद्धालुओं को एक नई अनुभूति के साथ किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जहाँ श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगो के लिए बाबाधाम के इतिहास से संबंधित प्रदर्शनी के साथ-साथ संध्या बेला भक्तिमय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले देवतुल्य श्रद्धालुओं को एक अच्छी और सुखद अनुभूति प्राप्त हो। इसके अलावा शिवलोक परिसर में प्रकृति से प्रेम भाव को दर्शाते हुए झारखंड से प्रकृति पर्व की महत्ता को बताने का प्रयास किया है। साथ ही शिवलोक के मध्य में होगा बैद्यनाथ मंदिर का दिव्य प्रारूप बनाया गया है। आगे परिसर में बाबा बैद्यनाथ, मां पार्वती और शक्ति पीठ हृदयपीठ की महिमा के साथ अमरनाथ यात्रा, आंध्र प्रदेश के श्री कालहस्ती मंदिर और त्रिपुरा-बांग्लादेश सीमा के निकट स्थित प्रसिद्ध उनाकोटि शिव मंदिर की मनमोहक झांकियां प्रदर्शित की गई। साथ ही श्री काल हस्ती मंदिर की भव्यता एवं भक्त कन्नप्पा की अनमोल भक्ति व वायुलिंगम की गाथा को बड़े हीं सहजता से प्रदर्शित किया गया है।
————————————————————
झारखंड सरकार और नागर विमानन (JFI) के सौजन्य से विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले में आने वाले देवतुल्य श्रद्धालुओं और आमजन की सुविधा के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार आगामी 04 अगस्त 2026 से देवघर और बासुकीनाथ के लिए विशेष हेलीकॉप्टर सेवा की शुरुआत करने जा रही है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुलभ, सुरक्षित और तीव्र हवाई दर्शन के माध्यम से सुखद और मनमोहक यात्रा प्रदान करना है।
इस सेवा का संचालन ‘झारखंड फ्लाइंग इंस्टीट्यूट’ के माध्यम से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (नागर विमानन), झारखंड सरकार द्वारा जारी निर्देशों के तहत श्रद्धालुओं के लिए निम्नलिखित आकर्षक पैकेज और दरें निर्धारित की गई हैं।
●देवघर आकाशीय परिदर्शन: 07 से 10 मिनट की इस हवाई परिक्रमा का किराया ₹2,850.00 प्रति व्यक्ति तय किया गया है।
●बासुकीनाथ आकाशीय परिदर्शन: 07 से 10 मिनट की हवाई परिक्रमा के लिए ₹2,850.00 प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित है।
●देवघर से त्रिकूट परिदर्शन: 10 से 15 मिनट की इस मनोरम हवाई यात्रा के लिए ₹3,750.00 प्रति व्यक्ति देय होगा।
● देवघर से बासुकीनाथ एकतरफा यात्रा: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए देवघर से बासुकीनाथ तक एकतरफा उड़ान सेवा भी शुरू की जा रही है। 15 मिनट के इस सफर का किराया ₹4,500.00 प्रति व्यक्ति होगा।
●बुकिंग एवं संपर्क सूत्र:
हेलीकॉप्टर सेवा का लाभ उठाने के लिए श्रद्धालु आधिकारिक वेबसाइट www.jharkhandaviation.in पर जाकर अपनी टिकट बुक कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की पूछताछ या सहायता के लिए संपर्क सूत्र 9122583111 भी जारी किया गया है।
————————————————————
जब बोल बम बोलने पर मिला दंड
27 सितंबर 1903 (शुक्रवार) को देवघर में वैद्यनाथजी की भाद्रपद पूर्णिमा के मेले की तैयारी चल रही थी। एसडीओ मिस्टर थॉम्पसन कोर्ट में सुनवाई कर रहे थे। बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों के ‘हर-हर बम बम’ और ‘बाबा वैद्यनाथजी की जय’ के नारों से वे चिढ़ गए। उन्होंने डिप्टी गिरीश चंद्र नाग को आदेश दिया कि शोर मचाने वाले सभी यात्रियों को पकड़कर कम से कम 8 आने जुर्माना लगाओ।
उन दिनों देवघर से जसीडीह जाने वाला रास्ता कोर्ट परिसर के बीच से होकर जाता था। पश्चिम से आने वाले भक्त इसी मार्ग से गुजरते हुए नारे लगाते थे, खासकर श्रीपंचमी, शिवरात्रि, दोल पूर्णिमा और भाद्रपद पूर्णिमा पर। थॉम्पसन मिशन से आए कट्टर कैथोलिक थे और भारतीय धार्मिक प्रथाओं से नाराज रहते थे। उन्होंने गांजा-भांग बेचने वालों को भी पकड़ना शुरू कर दिया।
शिकायत संताल परगना के कमिश्नर तक पहुंची। डिप्टी कमिश्नर सीएच बॉम्पास ने औचक जांच की और शिकायत सही पाई। भयभीत तीर्थयात्रियों ने रास्ता बदल लिया। बाद में मिस्टर पिफर्ड एसडीओ बने। वे सरल स्वभाव के थे, वैद्यनाथजी के द्वार तक जाते और माथा टेकते थे। थॉम्पसन के जाने के बाद लोगों ने राहत महसूस की। बॉम्पास के नाम पर आज भी ‘बॉम्पास टाउन’ मोहल्ला मौजूद है।


