एंबुलेंस की सुविधा नहीं होने से मरीजों को रेफर में हो रही है दिक्कतें
जितेन्द्र दास
पाकुड़। हिरणपुर प्रखंड की करीब एक लाख आबादी के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ही सरकारी स्वास्थ्य सेवा का प्रमुख केंद्र है। प्रतिदिन 80 से 100 मरीज इलाज के लिए यहां पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सकों की भारी कमी के कारण मरीजों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।अस्पताल में चिकित्सकों के सात स्वीकृत पद हैं, जबकि नियमित रूप से केवल प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिंह और दंत चिकित्सक डॉ. ऑफिन टोप्पो ही कार्यरत हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में डीएमएफटी के माध्यम से प्रतिनियुक्त डॉ. मनोज कुमार और डॉ. आदित्य रंजन सहयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव का असर मरीजों पर साफ दिखाई देता है।अस्पताल में एक भी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं का प्रसव जीएनएम और प्रतिनियुक्त चिकित्सकों की निगरानी में कराया जाता है। कई गर्भवती महिलाएं बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए अन्य अस्पतालों का रुख करने को मजबूर होती हैं।सीएचसी में बुखार, मलेरिया, टाइफाइड, टीबी, कालाजार, कुष्ठ रोग और एचआईवी जैसी बीमारियों की जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा एएनसी जांच, सुरक्षित प्रसव, एक्स-रे, पैथोलॉजी जांच, ऑपरेशन थियेटर, आईएलआर तथा आवश्यक दवाओं की भी व्यवस्था है। इससे सामान्य मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार मिल जाता है।हालांकि, जनरल मेडिसिन, शिशु रोग एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों का समुचित इलाज संभव नहीं हो पाता। ऐसे मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद पश्चिम बंगाल सहित अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
*हिरणपुर स्वास्थ्य केन्द्र के प्रमुख समस्याएं*
सात स्वीकृत पदों के मुकाबले नियमित रूप से केवल दो चिकित्सक कार्यरत।
50 बेड की आवश्यकता के बावजूद अस्पताल में केवल छह बेड की व्यवस्था।
एंबुलेंस की सुविधा नहीं होने से रेफर मरीजों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
महिला चिकित्सक का पद रिक्त होने से प्रसव सेवाएं सीमित संसाधनों के सहारे संचालित।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
सामान्य उपचार की सुविधा उपलब्ध, लेकिन जटिल बीमारियों के इलाज में कठिनाई।
*क्या कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी*
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिंह ने कहा कि चिकित्सकों की कमी के बावजूद उपलब्ध संसाधनों के साथ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया जाता है।
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