तेहरान । ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी है कि होर्मुज में अमेरिकी सेना की लगातार उपस्थिति वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को गंभीर रूप से बाधित कर सकती है। यह चेतावनी तब आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच नए सिरे से सैन्य संघर्ष शुरू हो गया है, दोनों देश एक-दूसरे के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। वैश्विक ऊर्जा व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी महत्वपूर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है, जिससे इसकी सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है। ईरानी सरकारी मीडिया में छपे बयान में, आईआरजीसी ने स्पष्ट किया है कि लगातार दखलंदाजी से ग्लोबल ऑयल और गैस सेक्टर में दिक्कत कम हो सकती हैं। आईआरजीसी के अनुसार, होर्मुज में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को समाप्त करना ही सामान्य शिपिंग यातायात को बहाल करने का एकमात्र तरीका है। तेहरान ने वाशिंगटन के कदमों को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ाने वाला बताया है। इस क्षेत्र में पहले भी वाणिज्यिक जहाजों पर हमले हो चुके हैं, जिसमें भारतीय क्रू मेंबर भी शामिल थे, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में लंबे समय तक व्यवधान आने का डर पैदा हो गया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका के नेतृत्व वाली नौसैनिक नाकेबंदी को फिर से लागू करने की घोषणा की है।
उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि होर्मुज से गुजरने वाले कार्गो पर 20 प्रतिशत ट्रांज़िट फीस लगाई और इस महत्वपूर्ण मार्ग की सुरक्षा का नियंत्रण वॉशिंगटन अपने हाथों में लेगा। ट्रंप का तर्क है कि दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रास्तों में से एक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बदले अमेरिका को मुआवजा मिलना चाहिए। हालांकि, ईरान ने प्रस्ताव को सिरे से खारिज किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने 20 प्रतिशत फीस के विचार का मज़ाक उड़ाकर बहुत ज्यादा बताया। ईरान बार-बार इस जलमार्ग पर अपने संप्रभु अधिकार पर जोर देता रहा है और वॉशिंगटन पर एक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट पर एकतरफा नियंत्रण थोपने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। यह गतिरोध वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है और पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और कीमतों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। आशीष दुबे / 14 जुलाई 2026


