दुमका। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) झारखंड प्रांत के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी के नेतृत्व में राजभवन पहुंचकर राज्यपाल सह कुलाधिपति से मुलाकात की। इस दौरान राज्य की उच्च शिक्षा में व्याप्त खामियों और छात्र-विरोधी नीतियों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय (एसकेएमयू) का प्रतिनिधित्व कर रहे एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री बमभोला उपाध्याय ने संथाल परगना प्रमंडल के हजारों छात्र-छात्राओं की ज्वलंत समस्याओं को महामहिम के समक्ष पुरजोर तरीके से रखा।
मुलाकात के दौरान एसकेएमयू के अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक (यूजी) स्तर पर नामांकन सीटों में की गई भारी कटौती का मुद्दा सबसे अहम रहा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि इस बेतहाशा कटौती के कारण संथाल परगना जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्र के हजारों गरीब और ग्रामीण छात्र उच्च शिक्षा पाने से वंचित हो रहे हैं। परिषद ने महामहिम से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए पूर्व की तरह ही स्नातक स्तर पर नामांकन सीटों को बहाल करने की मांग की। इसके अलावा, विश्वविद्यालय में अत्यधिक विलंब से चल रहे शैक्षणिक सत्रों और परीक्षा परिणामों में लगातार आ रही तकनीकी व प्रशासनिक गड़बड़ियों के कारण छात्रों को हो रही मानसिक परेशानी से भी उन्हें अवगत कराया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने संथाल परगना प्रमंडल के मॉडल और नवनिर्मित महिला महाविद्यालयों की बदहाली का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इन संस्थानों में शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की भारी कमी है, जिससे पठन-पाठन पूरी तरह ठप होने के कगार पर है। एबीवीपी ने इन पदों पर अविलंब नियमित बहाली की मांग रखी। साथ ही, दुमका, जामताड़ा और पाकुड़ जिले के छात्रों की सुविधा के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) की पढ़ाई जल्द शुरू करने और नई क्लस्टर व्यवस्था के कारण बंद हुए महत्वपूर्ण विषयों को दोबारा चालू करने का आग्रह किया गया।
विश्वविद्यालय में पारदर्शिता की वकालत करते हुए परिषद ने वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारियों पर त्वरित जांच बिठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जांच पूरी होने तक ऐसे अधिकारियों को सभी महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त रखा जाना चाहिए। छात्रों के आर्थिक बोझ को कम करने के लिए बीएड और व्यावसायिक (वोकेशनल) पाठ्यक्रमों को सेल्फ फाइनेंस व्यवस्था से हटाकर पूरी तरह सरकारी घोषित करने की अपील भी की गई। इसके अतिरिक्त, जेपीएससी परीक्षा परिणामों में सामने आ रही धांधलियों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित कराने का आग्रह किया गया।
एबीवीपी ने स्पष्ट किया कि संथाल परगना के शैक्षणिक ढांचे को मजबूत किए बिना पूरे झारखंड का समग्र विकास संभव नहीं है। महामहिम राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को अत्यंत गंभीरता से सुना और समस्याओं के त्वरित समाधान तथा छात्रहित में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का पूर्ण आश्वासन दिया।


