नई दिल्ली । अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने एसआईटी से जांच के मामले में अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा करने को कहा गया है। कोर्ट में हिंदू धर्मपरिषद् की याचिका समेत कुल 4 याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। धर्मपरिषद् की ओर से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चंदा चोरी की जांच की मांग की गई है।
सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली 3 सदस्यीय बेंच सुनवाई कर रही है। सुनवाई के शुरुआत में ही एसजी ने कहा कि राज्य प्राधिकार मामले की जांच कर रही हैं, लेकिन कोर्ट ने राम मंदिर ट्रस्ट को नोटिस जारी कर दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से अब तक की जांच का स्टेटस रिपोर्ट तलब किया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट समेत अन्य पक्षकारों को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी को अगली सुनवाई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि स्टेटस रिपर्ट में एसआईटी की संरचना का पूरा विवरण दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट से रखी गईं ये मांगें
सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच कुल 4 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। शेष 2 अलग-अलग याचिकाओं में पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है, जबकि तीसरी याचिका में सीबीआई की विशेष जांच टीम (एसआईटी) से जांच और सबूतों को सुरक्षित रखने और मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच जरूरी है। इन याचिकाओं में वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की तरफ से दायर एक रिट याचिका, अजय कुमार राय और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह की याचिका भी शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो जांच: कांग्रेस
इस बीच कांग्रेस ने भी राम मंदिर के लिए चंदा चोरी करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की। कांग्रेस के प्रवक्ता अजय उपाध्याय ने इसे आस्था के नाम पर लूट वाला मामला करार दिया। उपाध्याय ने जयपुर में कहा कि भगवान राम के नाम पर जुटाई गई निधि भाजपा-आरएसएस के लिए राजनीतिक लूट का साधन बन गई है। यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं है। यह दुनियाभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है। साथ ही विपक्ष राम मंदिर के चंदा प्रबंधन व्यवस्था में कथित आर्थिक अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग कर रहा है।


