नई दिल्ली । इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहां भारतीय संस्कृति की जड़ें गहरी हैं। खास बात यह है कि इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर हिंदू ज्यादा हैं और बहुत सुकून की जिंदगी गुजार रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत और इंडोनेशिया के संबंध कोई नए नहीं हैं। ईसा से पहले के समय से ही भारतीय व्यापारी और नाविक सदियों से वहां जाते रहे। इसी वजह से वहां हिंदू और बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव पड़ा। प्राचीन काल में श्रीविजया, मजापहित और गजाह मधा जैसे साम्राज्य फले-फूले। यहां तक कि इंडोनेशियाई भाषा ‘बहासा इंडोनेशिया’ में भी संस्कृत के कई शब्द हैं, जो इस रिश्ते को और भी गहरा बनाते हैं। इंडोनेशिया के उत्सवों, नृत्यों और कठपुतलियों के शो में अर्जुन, हनुमान, कौरव और राम जैसे पात्र नजर आते हैं।
इंडोनेशिया में रामलीला भी वैसी ही होती है। स्टेज पर कलाकार रामायण के पात्रों की तरह सजकर आते हैं और इस कहानी को दर्शाते हैं। इस दौरान किरदारों को निभाने वाले हिंदू-मुस्लिम दोनों ही होते हैं। इंडोनेशिया में सबसे खास बाली द्वीप है, जहां हिंदू ज्यादा रहते हैं। भारत से जाने वाले पर्यटकों की संख्या भी यहां खूब होती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यहां का हिंदू धर्म भारत से थोड़ा अलग है, लेकिन मंदिर, त्योहार और परंपराएं भारतीय संस्कृति से जुड़ी हुई हैं। यहां पर दुनिया का सबसे बड़ा बौद्ध स्तूप बोरोबुदुर भी है और प्रांबनन हिंदू मंदिर कॉम्प्लेक्स जैसे स्मारक प्राचीन विरासत को दिखाते हैं।
इंडोनेशिया में हिंदूओं की आबादी करीब 1.7फीसदी है, लेकिन उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता पूरी है। बाली में हिंदू बहुसंख्यक होने के कारण वहां सरकार भी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षण देती है। महाभारत और रामायण पर आधारित कार्यक्रम सरकारी स्तर पर आयोजित होते हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों में कट्टरता बढ़ी है, लेकिन बाली जैसे इलाकों में सांस्कृतिक सद्भाव अभी भी मजबूत है। इंडोनेशिया का आधिकारिक दर्शन पांच सिला भी विविधता में एकता पर आधारित है, जो भारत के विविधता में एकता के सिद्धांत से मिलता-जुलता है। प्राचीन समय में इंडोनेशिया में हिंदू और बौद्ध धर्म का पर्भाव सबसे अधिक था।
13वीं सदी के आखिर में पूर्वी जावा में हिंदू मजापहित साम्राज्य की स्थापना हुई थी, गजाह मधा के अधीन इसके प्रभाव का विस्तार उस क्षेत्र में हुआ जो आज इंडोनेशिया है। इंडोनेशिया जैसे देश में हिंदू ग्रंथों और मूर्तियों का सम्मान देखकर यह समझ आता है कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव कितना गहरा है। पीएम मोदी की इस यात्रा से उम्मीद है कि दोनों देश न केवल आर्थिक साझेदारी बढ़ाएंगे, बल्कि अपनी साझी सांस्कृतिक विरासत को भी और मजबूत करेंगे।


