नई दिल्ली । सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों के गंभीर आरोपों के मद्देनजर इंटरनेट कंपनी मेटा को तलब किया है। मंत्रालय ने कंपनी के एल्गोरिदम और ऐसे मामलों में उसकी जवाबदेही पर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राजस्व से जुड़े ऐसे मामलों में मेटा तीसरे पक्ष की सामग्री का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देश पर मंत्रालय ने मेटा से स्पष्टीकरण तलब किया है। यह कार्रवाई बीबीसी की उस रिपोर्ट के बाद की गई है जिसमें दावा किया गया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री वाले वीडियो और विज्ञापन उसके एल्गोरिदम द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे थे, भले ही कंपनी की नीतियां इसकी अनुमति नहीं देती हैं। मंत्रालय ने मेटा से ऐसे विज्ञापनों की स्वीकृति, सुधारात्मक उपायों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किए गए सुरक्षा उपायों पर विस्तृत जानकारी मांगी है। यह इस सप्ताह मेटा के खिलाफ दूसरी नियामक कार्रवाई है। इससे पहले सरकार ने व्हाट्सऐप के ‘यूजरनेम’ फीचर को लेकर भी मेटा को नोटिस जारी कर उसे रोकने का निर्देश दिया था। आईटी अधिनियम की धारा 67बी के तहत बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री का प्रकाशन एक दंडनीय अपराध है। मेटा ने अपने बयान में कहा है कि उसकी बाल यौन शोषण सामग्री के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति है और वह ऐसी सामग्री को हटाने के लिए उन्नत एआई का उपयोग करती है।
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