नई दिल्ली । भारत की जैव विविधता का दायरा और बढ़ गया है। 2025 के दौरान देश में 483 ऐसी जीव प्रजातियां खोजी गईं जिन्हें विज्ञान ने पहली बार दर्ज किया, जबकि 226 प्रजातियां ऐसी मिलीं जो पहली बार भारत में रिकॉर्ड की गईं यानी कुल 709 नए जीवों के रिकॉर्ड देश के जैव विविधता डेटाबेस में जुड़े हैं। इसके साथ ही भारत में वैज्ञानिक रूप से दर्ज जीव-जंतुओं की कुल संख्या बढ़कर 1,05,953 हो गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के 111वें स्थापना दिवस पर कोलकाता में आयोजित एनिमल टैक्सोनॉमी समिट-2026 में इसकी जानकारी दी गई। इस मौके पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने एनिमल डिस्कवरीज-2025, प्लांट डिस्कवरीज-2025 और फौना ऑफ इंडिया चेकलिस्ट वर्जन 3.0 जारी की। यादव ने कहा कि किसी भी जीव की पहचान और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के बिना उसका संरक्षण संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि दुनिया के कुल भूभाग का केवल 2.4फीसदी हिस्सा भारत के पास है, लेकिन यहां दुनिया की 7-8फीसदी दर्ज प्रजातियां पाई जाती हैं। यही वजह है कि भारत दुनिया के 17 सबसे जैव विविध देशों में शामिल है।
उन्होंने बताया कि केरल में सबसे ज्यादा 98 नई प्रजातियां, पश्चिम बंगाल में 76, कर्नाटक में 67 और अरुणाचल प्रदेश में 65 नई प्रजातियां दर्ज की गईं। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण की उपलब्धियां भी गिनाईं। उनके मुताबिक 2014 के बाद देश में टाइगर रिजर्व की संख्या 47 से बढ़कर 58 हो गई है। एशियाई शेरों की संख्या 523 से बढ़कर 891 पहुंच गई। वहीं, रामसर साइट्स 24 से बढ़कर 100 और ईको-सेंसिटिव जोन करीब 1,865 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 68,500 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो गए हैं।
इस अवसर पर पैलियोइंडिया पोर्टल भी लॉन्च किया गया। इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर देशभर में मिले 5,000 से ज्यादा जीवाश्म की जानकारी उपलब्ध होगी। इससे वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोग भी जीवाश्मों और जैव विविधता से जुड़ी जानकारी आसानी से देख सकेंगे। कार्यक्रम में जैव विविधता संरक्षण में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक को जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित 111 घंटे के राष्ट्रीय हैकाथॉन के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।


