नई दिल्ली । अक्सर लोग गर्दन और कंधों के बीच असामान्य रूप से चर्बी जमा होने से उभरी हुई गांठ सामान्य मोटापे का हिस्सा मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह सिर्फ वजन बढ़ने का परिणाम नहीं होता। इसे चिकित्सकीय भाषा में बफैलो हंप या डोर्सोसर्वाइकल फैट पैड कहते हैं। विशेषज्ञों की माने तो यह हार्मोनल असंतुलन, कुछ दवाओं के लंबे समय तक सेवन या अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों का भी संकेत हो सकता है, जिसकी सही पहचान और उपचार आवश्यक है। बफैलो हंप का सबसे प्रमुख कारण कुशिंग सिंड्रोम हो सकता है, जहाँ शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। यह एड्रिनल ग्लैंड में ट्यूमर, पिट्यूटरी ग्लैंड की समस्या या लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के इस्तेमाल की वजह से हो सकता है, जिससे शरीर में वसा का असामान्य वितरण होता है। इसके अतिरिक्त, अस्थमा, गठिया, त्वचा रोग और कई ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाने वाली कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं भी बफैलो हंप का कारण बन सकती हैं। इन दवाओं का लंबे समय तक सेवन शरीर में फैट जमा होने के तरीके को बदल सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इन्हें शुरू या बंद नहीं करना चाहिए।
कुछ मामलों में, एचआईवी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी भी शरीर में फैट के वितरण को प्रभावित कर सकती है, जिससे चेहरे और हाथ-पैरों की चर्बी कम होती है, जबकि गर्दन, पेट और सीने के आसपास फैट जमा हो सकता है। हालांकि अधिक वजन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और असंतुलित खानपान भी गर्दन के पीछे चर्बी बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं, पर विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मोटापा ही बफैलो हंप का एकमात्र कारण नहीं होता, खासकर जब हार्मोनल असंतुलन भी मौजूद हो। खराब पोस्चर, जैसे लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का उपयोग, अकेले कारण नहीं है लेकिन यह गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को कमजोर करके समस्या को और स्पष्ट कर सकता है। यदि गर्दन के पीछे लगातार चर्बी बढ़ रही हो, गांठ जैसी उभरी हुई दिखाई दे, गर्दन या कंधों में दर्द या जकड़न हो, या इसके साथ वजन बढ़ना, चेहरे पर सूजन, उच्च रक्तचाप या अन्य हार्मोनल बदलाव नजर आएं, तो डॉक्टर से तुरंत जांच कराना जरूरी है। बफैलो हंप का उपचार पूरी तरह इसके मूल कारण पर निर्भर करता है। कुशिंग सिंड्रोम होने पर हार्मोनल उपचार या सर्जरी की जा सकती है। यदि स्टेरॉयड दवाएं वजह हैं, तो डॉक्टर की निगरानी में उनकी मात्रा धीरे-धीरे कम की जाती है। मोटापे या जीवनशैली से जुड़ी समस्या होने पर, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित करने से काफी फायदा मिल सकता है।
कार्डियो एक्सरसाइज, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और डॉक्टर की सलाह के अनुसार किए गए व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। यदि अन्य उपचारों से लाभ न मिले और फैट अत्यधिक जमा हो, तो लाइपोसक्शन जैसी सर्जिकल प्रक्रिया पर भी विचार किया जा सकता है। नियमित योगाभ्यास और सही बैठने-उठने की आदत अपनाने से भी गर्दन और कंधों पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है, हालांकि योग गंभीर हार्मोनल बीमारी का सीधा इलाज नहीं है। गर्दन के पीछे उभरी हुई गांठ को केवल मोटापा मानकर अनदेखा करना सही नहीं है। यह शरीर के भीतर चल रही किसी गंभीर समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है।
सुदामा/ईएमएस 03 जुलाई 2026


