नई दिल्ली । अल नीनो के प्रकोप का असर अब स्पष्ट से दिख रहा है। बीते जून का महीना बेहद सूखा गुजरा है, इस जून के सूखे ने 140 करोड़ भारतीयों के हलक सुखा दिए हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह बीते 100 वर्षों में तीसरा सबसे सूखा जून महीना साबित हुआ है, जिसने आगामी मॉनसून और जल संकट को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस जून में देश भर में सामान्य के मुकाबले 42 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। औसत रूप से जहां 157.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, वहीं सिर्फ 92.2 मिलीमीटर बारिश हुई। पिछले एक शताब्दी (1927-2026) में केवल दो बार ही जून में इससे कम बारिश हुई है। 2009 में 87.5 मिलीमीटर और 2014 में 92.1 मिलीमीटर। यह दिखाता है कि इस बार बारिश की कमी कितनी गंभीर रही है।
हालांकि, जुलाई के पहले सप्ताह से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। आईएमडी के वैज्ञानिकों ने मध्य भारत सहित देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी और संतुलित बारिश की संभावना है, जहां इस जून में 54 प्रतिशत की सर्वाधिक कमी दर्ज हुई है। इसके अलावा, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 41 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम में 30 प्रतिशत और दक्षिण भारत में 28 प्रतिशत बारिश की कमी रही, जो अल नीनो के व्यापक प्रभाव को दर्शाती है। देश के चारों बड़े क्षेत्रों में एक साथ इतनी बड़ी कमी अल नीनो के प्रकोप की ओर इशारा कर रही है।
वैज्ञानिकों ने सुपर अल नीनो के मजबूत होने की आशंका जाहिर की है, जिसके चलते आने वाले दिनों में भारत के कुछ क्षेत्रों में अनाज संकट, सूखे और यहां तक कि भुखमरी जैसी स्थितियों का खतरा मंडरा रहा है। अल नीनो प्रशांत महासागर के समुद्री जल के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करती है और भारतीय मॉनसून को कमजोर कर सकती है। यदि यह स्थिति और प्रबल होती है, तो बारिश के महीनों में भी भीषण गर्मी पड़ने की संभावना रहेगी। इस साल 4 जून को केरल में कमजोर शुरुआत के बाद मॉनसून अब तक अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है। दिल्ली जैसे कई बड़े शहर अभी भी मॉनसून का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कई राज्यों में पर्याप्त बारिश न होने से किसानों और आम जनता की चिंताएं बढ़ गई हैं।


