संताल एक्सप्रेस
जितेन्द्र दास
पाकुड़। झारखंड का पाकुड़ जिला आज भले ही अपने पत्थर उद्योग के लिए देशभर में पहचान रखता हो, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यहां का चमड़ा उद्योग भी आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था। इसी गौरवशाली औद्योगिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण निशानी हिरणपुर थाना क्षेत्र के तारापुर गांव के समीप स्थित बाटा कंपनी का पुराना चमड़ा गोदाम है, जो आज उपेक्षा और रख-रखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुका है।स्थानीय इतिहासकारों और बुजुर्गों के अनुसार, कई दशक पहले पाकुड़ क्षेत्र में चमड़ा उद्योग का व्यापक विस्तार था। तारापुर स्थित इस गोदाम में आसपास के क्षेत्रों से एकत्रित कच्चे चमड़े का भंडारण और प्रसंस्करण किया जाता था। यहां से तैयार चमड़ा और अन्य सामग्री देश की प्रसिद्ध जूता निर्माता कंपनी बाटा को भेजी जाती थी। उस दौर में यह गोदाम न केवल व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र था, बल्कि सैकड़ों लोगों की आजीविका का भी प्रमुख स्रोत माना जाता था।बताया जाता है कि पत्थर और लाह उद्योग के साथ-साथ चमड़ा उद्योग ने भी जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की थी। गोदाम के आसपास व्यापारिक गतिविधियां होती थीं और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते थे। लेकिन समय के साथ बदलती परिस्थितियों, उद्योग में आई गिरावट और पर्याप्त संरक्षण के अभाव में यह क्षेत्र अपनी पहचान खोता चला गया। धीरे-धीरे चमड़ा उद्योग पूरी तरह समाप्त हो गया और बाटा कंपनी का यह गोदाम भी वीरान पड़ गया।
वर्तमान में हिरणपुर-तारापुर मार्ग पर स्थित इस ऐतिहासिक भवन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है। भवन की दीवारें टूट चुकी हैं, छतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और पूरा परिसर झाड़ियों से घिर गया है। कभी औद्योगिक समृद्धि का प्रतीक रहा यह गोदाम अब केवल खंडहर के रूप में नजर आता है, जो जिले के स्वर्णिम औद्योगिक इतिहास की मूक गवाही दे रहा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन केवल एक पुराना गोदाम नहीं, बल्कि पाकुड़ की औद्योगिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका मानना है कि यदि इस ऐतिहासिक स्थल का संरक्षण किया जाए और इसे विरासत स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो आने वाली पीढ़ियां जिले के औद्योगिक इतिहास से परिचित हो सकेंगी।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


