नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं से कहा है कि वे जून के आखिर तक क्लॉड मिथोस जैसे फ्रंटियर एआई मॉडल से पैदा हुए जोखिमों का आकलन बोर्ड की मंजूरी के साथ करें। साथ ही आरबीआई ने इससे निपटने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का भी निर्देश दिया है। मामले से अवगत लोगों के मुताबिक इसमें संस्थाओं द्वारा एक व्यवस्थित साइबर सुरक्षा ढांचा स्थापित करना, एआई आधारित विरोधात्मक परीक्षण करना और मौजूदा कमजोरियों की पहचान करना शामिल है। नियामक ने एआई से संबंधित जोखिमों पर ध्यान ऐसे समय में दिया है जब फ्रंटियर एआई मॉडल ने जीरो-डे यानी तत्काल की कमजोरियों की पहचान करने की क्षमताएं प्रदर्शित की हैं। इससे उद्योग में चिंताएं पैदा हुई हैं। फिलहाल वैश्विक स्तर पर मिथोस तक पहुंच चुनिंदा कंपनियों तक ही सीमित है। ऐसे में भारतीय वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने संचालन में संभावित उपयोग मामलों के लिए पहले से उपलब्ध अन्य उन्नत एआई मॉडल का आकलन करें।
ईवाई इंडिया के पार्टनर कार्तिक शिंदे ने कहा कि वित्तीय संस्थान किसी भी फ्रंटियर एआई मॉडल का इस्तेमाल कर अपने बाहरी इंटरनेट से जुड़े बुनियादी ढांचे का आकलन करते हुए इसकी शुरुआत कर सकते हैं। आरबीआई और सेबी द्वारा विनियमित संस्थाओं को मिथोस की सलाह के मद्देनजर अपनी कमजोरियों का आकलन करना जरुरी है, जिसमें एआई विरोधात्मक परीक्षण, एआई का इस्तेमाल कर मौजूदा कमजोरियों के लिए स्कैनिंग आदि शामिल हैं। हम मानव आधारित अपने पारंपरिक सुरक्षा जांच में बेहद सक्रियता के साथ एआई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एक फिनटेक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस क्षेत्र की कंपनियों ने इस मॉडल का आकलन करने के लिए मिथोस तक सीमित पहुंच की मांग की है लेकिन एंथ्रोपिक की मंजूरी मिलने का इंतजार है। अधिकारी ने कहा कि अब इस बात का आकलन किया जा रहा है कि क्या उन्नत एआई मॉडल का इस्तेमाल डेटा स्थानीयकरण आवश्यकताओं के बारे में चिंताएं बढ़ा सकता है या आंतरिक प्रणालियों और आर्किटेक्चर के संपर्क में आने से साइबर सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।


